ग्लोबल गुमटी

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प्रेम में भरोसा और ईर्ष्या

प्रेम में भरोसा और ईर्ष्या

किसी का भरोसा एक बार तोड़ने के बाद उसे फिर से बनाना कठिन होता है. जब भरोसा ही फिर से नहीं बन सकता तो प्रेम को पुनर्जागृत करने की कल्पना भी व्यर्थ है.

पद्मिनी तो कल्पना है, असली तो वीर कुंवर-धरमन की प्रेमकहानी है…

पद्मिनी तो कल्पना है, असली तो वीर कुंवर-धरमन की प्रेमकहानी है…

भारत के स्वतन्त्रता संग्राम के बारे में थोड़ी भी जानकारी रखने वाले ने वीर कुंवर सिंह का नाम जरुर सुन रखा होगा। वैसे तो कुंवर साहब की बहादुरी और योद्धा वृत्ति पर बहुत कुछ लिखा-पढ़ा गया है। इसलिए यह कोई
सीता-रावण :एक प्रेमगाथा

सीता-रावण :एक प्रेमगाथा

सीता-रावण :एक प्रेमगाथा   त्रेता युग की बात है , दशरथ द्वारा राम के वनवास का आदेश निकाला जा चुका था, इस बात से सीता काफी रोमांचित थी। जबसे सीता मिथिला से आयी थी कही घूमने नहीं जा पायी थी
नयी किताब – क्षितिज रॉय की गंदी बात

नयी किताब – क्षितिज रॉय की गंदी बात

क्षितिज रॉय की गंदी बात   गंदी बात -ये उपन्यास नहीं, मगध एक्सप्रेस है जो एक दिन पटना से एक प्रेम कहानी लेकर दिल्ली आती है और फिर इसमें से प्रेम दिल्ली में कहीं खो जाता है और बस कहानी
125 करोड़ से अधिक भारतीय : ‘पद्म सम्मान’ की संख्या 125 भी नहीं

125 करोड़ से अधिक भारतीय : ‘पद्म सम्मान’ की संख्या 125 भी नहीं

भारत की आबादी 125 करोड़ से भी कई करोड़ अधिक है, किन्तु भारत सरकार द्वारा प्रतिवर्ष गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या (25 जनवरी) को घोषित किये जानेवाले ‘पद्म सम्मान’ (Padma Award) की संख्या 125 भी नहीं है, क्योंकि 125 में
कब तक सबको राष्ट्रद्रोही और गद्दार का सर्टिफिकेट देते रहेंगे?

कब तक सबको राष्ट्रद्रोही और गद्दार का सर्टिफिकेट देते रहेंगे?

अपने हक़ के लिए आवाज़ उठाना अच्छी बात है. अपने जजमेंट से उसकी की प्रासंगिकता मत ख़त्म कीजिए.अग़र किसी ने आवाज़ उठाई है तो उसे समर्थन नहीं दे सकते तो…

क्या आज की शादी में भी कुंडली मिलान जरूरी है ?!

क्या आज की शादी में भी कुंडली मिलान जरूरी है ?!

कुंडली मिलान की औचित्यता पर सवाल कुंडली मिलान समय की रफ्तार के साथ धीरे- धीरे मंद पड़ने लगा है ! वक्त का तकाजा भी है कि बरसों से उपजे प्रेम को सिर्फ एक झटके में तोड़ कर खाक बना देने
गर्ल्स मोलेस्टेशन और विचारो की अभिव्यक्ति

गर्ल्स मोलेस्टेशन और विचारो की अभिव्यक्ति

गर्ल्स मोलेस्टेशन पर अक्षय कुमार अपना गुस्सा नहीं दिखा सकते? कुछ बोल नहीं सकते? क्यों…? …क्योंकि वो सार्वजनिक मंच पर अपनी पत्नी ट्विंकल खन्ना से अपनी जीन्स का बटन खुलवाते हैं? सिर्फ़ इसलिए… या इस गलती का एहसास होने के
बकरे की पूँछ

बकरे की पूँछ

बकरे की पूँछ बकरे की पूँछ ये कौन सी शीर्षक हुआ कहानी का? पूर्वांचल का हरेक बकरा अपनी पूँछ में एक कहानी लिए या कहानी बनने के लिए, ख़ाली खेतो में, खलिहानों में, नहरो के किनारे आपको चरता मिल जाएगा।
ओम पुरी को याद करते हुए

ओम पुरी को याद करते हुए

अपने अंतिम दिनों में पत्नी नंदिता से तलाक,भारतीय सेना को लेकर टिप्पणी और फिर माफ़ी,अकेलेपन से अवसाद और फिर लगातार शराब के लत ने ओम पुरी को तोड़ कर रख दिया था.

क्यूंकि ये मज़ाक फूहड़ है लल्लनटॉप नहीं…

क्यूंकि ये मज़ाक फूहड़ है लल्लनटॉप नहीं…

मज़ाक और मखौल में भी अंतर है वरना तो लेखक होने से बेहतर सुझाव है कि कृष्णा-सुदेश की टीम में शामिल हो जाइए. नाम और शोहरत दोनों ज़्यादा मिलेगी

भादों महीने की पिया का ख़त…

भादों महीने की पिया का ख़त…

भादों महीने की पिया का ख़त ऐ पिंकिया के पापा गाँव के सारे बाहर रहने वाले लोग यह कहकर घर आ रहे है की भादो में बाहर कोई काम नहीं है। आप भी आ जाइये ना, घर इस बार। बरसात
राड़, सांड़, सोढ़ी, संन्यासी, इनसे बचे सो सेवै काशी..बनारस डायरीज 1

राड़, सांड़, सोढ़ी, संन्यासी, इनसे बचे सो सेवै काशी..बनारस डायरीज 1

कुछ है बनारस में कि अब बड़े बड़े चमचमाते मॉल आ गए हैं, जगह जगह इडली के स्टाल लग गए हैं पर बनारस है कि कशी की लंगोट को छोड़ता ही नहीं। यह बनारस ही है, जहां गंगा की धारा उलट गई, आम लंगड़ा हो गया, बातें बतरस में बदलकर किस्से और कहावत में बदल गयीं

चीन : मालिनी अवस्थी जी की नजर से…

चीन : मालिनी अवस्थी जी की नजर से…

क्यूँ हर भारतीय को एक बार चीन जरूर जाना चाहिए, बता रही हैं पद्मश्री मालिनी अवस्थी जी और साथ ही इस यात्रा से कैसे चीन के बारे में टूटे उनके पूर्वाग्रह…

क्या शिक्षा भी भाग्य भरोसे हो चली ….?

क्या शिक्षा भी भाग्य भरोसे हो चली ….?

हमारे शासकों को बस-रेलवे-हवायान तो स्मार्ट दिखता है,पर पाठशाला की जर्जर होती छतें भारत का त्यागा हुआ इलाका लगती हैं. इसलिए आओ! और आकर भारत का भाग्य सँभालोे।

ये आज के सच की तस्वीर है…

ये आज के सच की तस्वीर है…

कैश के लिए बैंक की लाइन से अपना नंबर हट जाने पर ये बुजुर्ग वहीं खड़े-खड़े ही रोने लगा। सोशल मीडिया पर यह तस्वीर वायरल हो गई है और नोटबंदी का एक सच दिखाती है

ताकि स्वच्छ, सलामत, और स्वाभिमानी रहे भोजपुरी…

ताकि स्वच्छ, सलामत, और स्वाभिमानी रहे भोजपुरी…

ताकि स्वच्छ, सलामत, और स्वाभिमानी रहे भोजपुरी…अपनी मातृभाषा की अस्मिता की तलाश असल में अपनी जड़ों के साथ कहीं गहरे लगी हुई अपनी मिट्टी, अपनी परंपरा और इस अर्थ में स्वयं अपनी तलाश का प्रयास होता है. अपनी माईभाषा से लगाव भले व्यक्ति का निजी भावनात्मक मामला लगे पर वास्तव में यह इससे कहीं ऊपर सारे समाज के हित से जुड़ता है. ऐसे में आखर और अम्बा जैसे संघर्षों और आन्दोलनों की लड़ाई सिर्फ एक भाषा के उत्थान की नहीं रह जाती यह उस भाषा से जुड़े समूचे समाज में स्वाभिमान के दबे अलाव को सुलगाने की कोशिश बन जाती है

मान मत दो तुम मुझे अपमान दे दो, मैं बहुत आभार मानूँगा तुम्हारा

मान मत दो तुम मुझे अपमान दे दो, मैं बहुत आभार मानूँगा तुम्हारा

भिखारी भी बाक़ी भिखारियों से ज़्यादा कमाने से उनके सामने तीस मार खाँ बन सकता है। दिखावा हमारी शान बन गया है। आदमी हवाईजहाज़ में बैठता बाद में है, पहले फ़ेसबुक पर status डालता है।

ऐ सर! हमने क्या किया जो हमको लाइन में लगाते हैं

ऐ सर! हमने क्या किया जो हमको लाइन में लगाते हैं

सेवा में, आदरणीय प्रधानमंत्री महोदय जी, हुजूर सबसे पहले तो मैं नीलोत्पल आपके चरण छू प्रणाम करता हूँ और इसका मुख्य कारण आपका बुज़ुर्ग होना और मेरा भारतीय संस्कारिता में पला बढ़ा होना है,कृपया कम से कम आप इसे भारतीय
आगे कई और कुलदीप बनेंगी क्योंकि लड़कों से गलती होती रही है, होती रहेगी

आगे कई और कुलदीप बनेंगी क्योंकि लड़कों से गलती होती रही है, होती रहेगी

क्योंकि, लड़को से गलतियां होती रहती हैं। और लड़कियों की मौत तो होती रहती है। या तो गर्भ में ही भ्रूण के तौर पर और अगर बचकर पेट से पालने तक का सफर कर भी लिया तो आगे चलकर बठिंडा
क्यूंकि राजनीति में अपमान के प्रतिशोध से जन्म लेती है जयललिता…

क्यूंकि राजनीति में अपमान के प्रतिशोध से जन्म लेती है जयललिता…

एक चीज इन तीनों में कॉमन रही है कि तीनों ने अपमान का बदला को अपना व्यक्तिगत और राजनीतिक मिशन बनाया और इसी प्रतिशोध की आग से इनका राजनैतिक कैरियर भी चमक उठा.

क्यूंकि परिवर्तन ही संसार का सबसे अस्थायी सत्य है…

क्यूंकि परिवर्तन ही संसार का सबसे अस्थायी सत्य है…

#वैधानिक_चेतावनी अगर वर्तमान परिस्थितियों से त्रस्त होकर कुछ बदल डालना चाहते हैं तो आगे ना पढ़े क्योंकि हो सकता है कि इसके बाद खोपड़ी में शार्ट सर्किट हो जाये और दिमाग के फ्यूज उड़ जाये। कृपया खुद से संबंध स्थापित
एक चिठ्ठी उनके नाम जिन्हें मैंने कभी देखा ही नहीं

एक चिठ्ठी उनके नाम जिन्हें मैंने कभी देखा ही नहीं

तुम्हारी याद आ जाती है जब कोई अपनी नानी का ज़िक्र करता है और उस याद में तुम दिखती हो माँ जैसी, लाल साड़ी पहने, सर पर पल्ला डाले, माथे पर बड़ी सी लाल बिंदी…न तुम सिर्फ बहुत जल्दी इस दुनिया से चली गयी पर “पता है मेरी नानी कहती है” वाली मेरी कहानियाँ भी अपने साथ ले गयी.

लैला-मजनूं की अमर प्रेम कहानी के कुछ अनछुए पहलू..

लैला-मजनूं की अमर प्रेम कहानी के कुछ अनछुए पहलू..

लैला-मजनूं की अमर प्रेम कहानी के कुछ अनछुए पहलू..   अरब के प्रेमी युगल लैला-मजनूँ सदियों से प्रेमियों के आदर्श रहे हैं और रहें भी क्यों नहीं, इन्होंने अपने अमर प्रेम से दुनिया को दिखा दिया है कि मोहब्बत इस
हर रेल दुर्घटना के बाद हमारी संवेदनाओं पर उठते कुछ शर्मनाक सवाल

हर रेल दुर्घटना के बाद हमारी संवेदनाओं पर उठते कुछ शर्मनाक सवाल

पिछले हफ्ते कानपुर के पुखरायां में इंदौर-पटना एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हो जाती है। दुर्घटना कितनी वीभत्स रह होगी, इसका अंदाज़ा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि पिछ्ले 6 सालों में ये सबसे बड़ी रेल दुर्घटना है, आधिकारिक आंकड़े 130+
एक वैज्ञानिक जिस पर टैगोर ने लिख डाली कविता….

एक वैज्ञानिक जिस पर टैगोर ने लिख डाली कविता….

एक वैज्ञानिक जिसे न केवल साहित्य में रूचि थी बल्कि अच्छा ज्ञान भी रखता था.रवीन्द्र जैसे चिरबंधु बसु को मिले जिन्होंने उनके गौरव पर एक बांग्ला कविता भी लिखी…

अपने प्रयोग पर था इतना भरोसा कि चख लिया पोटेशियम साइनाइड

अपने प्रयोग पर था इतना भरोसा कि चख लिया पोटेशियम साइनाइड

उन्होने एक पौधे पर पोटेशियम साइनाइड का प्रयोग किया किन्तु पौधा मुरझाने की बजाय और अधिक खिल उठा. पर उन्हें अपने प्रयोग पर गहरा भरोसा था. इस भरोसे को साबित करने के लिए उन्होने उस पदार्थ को उठाकर चख लिया. ये देखकर वहां बैठे रॉयल सोसाइटी के वैज्ञानिकों की चीख निकल गयी…

आपकी भागीदारी