ग्लोबल गुमटी

alvida-amma-by pooja tripathi

अलविदा अम्मा

अलविदा अम्मा

कल शाम को भाभी का मेसेज आया कि अम्मा नहीं रही और आँखें डबडबा गयी.अम्मा हम सबकी अम्मा थी, हमारे घर की सबसे बड़ी. और वो सही मायने में सबसे बड़ी थीं.

सोचती हूँ कि अगर मेरी दादी होती तो उनके जैसे ही होतीं.निशछल प्रेम के बाल जब सफ़ेद हो जाते होंगे, चेहरा झुर्रियों से भर जाता होगा और तब भी अगर यह चिंता रहे कि “घर में सबने कुछ खाया की नहीं” तब उसका चेहरा बिलकुल अम्मा जैसा दिखता होगा.

वो मेरे फूफाजी की माँ थी पर उनमें हर किसी को कहीं पीछे छूट गयी अपनी माँ दिखती थी, उन्हें देखकर घर में हर किसी को ये तसल्ली होती थी कि बूढ़ी होती हुई माँ ऐसी ही होती होंगी. पर उन्होंने कभी अपने बड़े होने का कोई क्लेम नहीं माँगा. वो हमसे भी उतना ही लाड़ करती थी जितना माँ- पापा से.

अम्मा मेरी फेवरिट थीं.मैंने बहुत पहले यह जाना था कि अम्मा बहुत प्रोग्रेसिव औरत हैं. अम्मा को वो लड़कियां बहुत अच्छी लगती थी जो अपने पैरों पर खड़ी रहती थी, जो खूब पढाई करती हैं.

एक ऐसे परिवेश से आती औरत जहाँ लड़कियों का अस्तित्व सिर्फ शादी कर बच्चे पैदा करना था, अम्मा के विचार गीली मिट्टी की सौंधी खूशबू जैसे थे. मैं जब प्री मेडिकल एंट्रेंस की तैयारी कर रही थी तो हर सन्डे टेस्ट देने के बाद अपनी सहेलियों के साथ बुआ के घर पहुँच जाती थी, वो हम सभी से बहुत प्यार करती थी और उनका हमेशा का आर्डर होता था कि यहाँ सबको आना ही है.

जब माँ का हाथ पकड़ कर उन्होंने कहा था कि बच्चों की शादी उनकी पसंद से ही करना चाहिये तो वो मुझे अपने समय से बहुत आगे की, अपने समय से परे, अपने समय की भेड़चाल से अलग पर समय के निशान लिये दिखाई दी थी.

पिछली बार जब अम्मा से मिली थी, तो उन्होंने कहा था कि तुम्हारी फोटो दिखाते हैं सब और आजकल लिखती भी हो ना कुछ. तो वही कुछ लिख कर आपको याद करती हूँ

अम्मा आज अब घर जाउंगी तो वो धीमी सी आवाज़ नहीं आयेगी “ अरे पूजा को कुछ खिलाया की नहीं?” वो फिर से पाँव छूने से नहीं रोकेंगी “लड़कियां लक्ष्मी होती हैं” कहकर और मैं फिर भी पैर छूने के लिये नहीं झुकूंगी.

जानती हूँ कि मेरा छोटा सा शहर आज रो रहा होगा, स्नेह का एक बड़ा हिस्सा आज खाली हो गया. अम्मा के ही शब्दों में कहूँ तो “फिर आना ,अगली बार और ज्यादा समय लेकर”

अलविदा अम्मा.

2 Comments on “अलविदा अम्मा

Comments are closed.

आपकी भागीदारी