ग्लोबल गुमटी

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क्यूंकि ये मज़ाक फूहड़ है लल्लनटॉप नहीं…

क्यूंकि ये मज़ाक फूहड़ है लल्लनटॉप नहीं…

मज़ाक और मखौल में भी अंतर है वरना तो लेखक होने से बेहतर सुझाव है कि कृष्णा-सुदेश की टीम में शामिल हो जाइए. नाम और शोहरत दोनों ज़्यादा मिलेगी

एक वैज्ञानिक जिस पर टैगोर ने लिख डाली कविता….

एक वैज्ञानिक जिस पर टैगोर ने लिख डाली कविता….

एक वैज्ञानिक जिसे न केवल साहित्य में रूचि थी बल्कि अच्छा ज्ञान भी रखता था.रवीन्द्र जैसे चिरबंधु बसु को मिले जिन्होंने उनके गौरव पर एक बांग्ला कविता भी लिखी…

एक थी टुनटुन…

एक थी टुनटुन…

महिला हास्य कलाकारों में कोई आज तक टुनटुन के बराबर नहीं पहुँच सकी. वजनदार शरीर को उन्होंने वजनदार अभिनय से अपनी ताकत बना लिया….

मिर्ज़ा-साहिबा.. वो कहानी जो प्रेम को अमर कर गयी

मिर्ज़ा-साहिबा.. वो कहानी जो प्रेम को अमर कर गयी

मिर्ज़ा-साहिबा .. वो कहानी जो प्रेम को अमर कर गयी     गहरे दर्द जुदाइयों के, शोले जैसी जान कोई लाल चिंगारी इश्क़ दी, फिर अग्ग लगे आसमान.. मिर्ज़ा ने कई दफ़े देखा था उसे, संग-साथ बचपन का जो बीता
फिर एक गाँठ….

फिर एक गाँठ….

फिर एक गाँठ     उस शाम इला का फ़ोन आया ‘शनिवार को क्या कर रही हो?’ मैं किसी भी दिन क्या कर रही होउंगी नहीं जान पाती. दिन ही यह तय करता है मानो कि मुझसे क्या करवाएगा. कुछ ना
बीस रुपये का नोट..

बीस रुपये का नोट..

बीस रुपये का नोट..   पिछले तीन दिनों से घर से बस स्टैंड बस स्टैंड से मेट्रो और मेट्रो से होते हुए सरकारी दफ्तर तक आपके साथ चक्कर लगा रहा है वो। आपके पर्स की छोटी जेब में वो मैला
इन आँखों की मस्ती के…

इन आँखों की मस्ती के…

इन आँखों की मस्ती के… मस्ताने हजारो थे.. है.. और रहेंगे..     14 वर्षीय साँवली और भरे गालों वाली एक लड़की भानुरेखा, लाइट्स की चकाचौंध के बीच खड़ी है, दृश्य है 5 मिनट्स लंबे चुम्बन को फिल्माने का. एक
एक दिन जब मेरी मुझसे ही बात हुई

एक दिन जब मेरी मुझसे ही बात हुई

डिअर मैं और मेरी तुम तुम हमेशा वैसी लड़की रही हो जैसी मैं होना चाहती हूँ, मैं तुम्हें बहुत पसंद करती हूँ इसीलिए जब भी परेशान होती हूँ तुम्ही को चिट्ठी लिखती हूँ। तुम्हे सारे जादू आते हैं, तुम कन्धों
गुनाहों का देवता

गुनाहों का देवता

गुनाहों का देवता-आँसुओं से भीगी एक प्रेम कहानी गुनाहों का देवता- बगीचे में नरम घास पर लेटकर बादलों को देखती हुई दो सहेलियाँ- सुधा और गेसू . सुधा जो ज़िन्दगी को यूँ ही बादलों को देखते हुए बिता देना चाहती है
इस चहकती लड़की से इसके ‘फर्स्ट किस’ के रुमानी किस्से हर बार अलग अंदाज़ में सुने हैं

इस चहकती लड़की से इसके ‘फर्स्ट किस’ के रुमानी किस्से हर बार अलग अंदाज़ में सुने हैं

बंद घड़ी के कैद में-उम्मीद 3 बजकर 40 मिनट। वह दीवार पर टँगी एक बंद घडी को देख रही है। मैं घडी देखती हुई उस लड़की को। ये वही लड़की है जिसके साथ बारिश में भीगते हुए शम्मी कपूर के
मैं प्यार लिखना चाहती हूँ

मैं प्यार लिखना चाहती हूँ

मैं प्यार लिखना चाहती हूँ ‘कभी धरती के तो कभी चाँद नगर के हम हैं’ वह कविताएँ लिखता है, प्रेम बुनता है, उसके शब्दों में छिपा अपना ज़िक्र पहचानकर मुस्कुराती भी हूँ| लेकिन मैं इंतज़ार नहीं करती कि अपनी कविताओं
आपकी भागीदारी