ग्लोबल गुमटी

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ऐ सर! हमने क्या किया जो हमको लाइन में लगाते हैं

ऐ सर! हमने क्या किया जो हमको लाइन में लगाते हैं

सेवा में, आदरणीय प्रधानमंत्री महोदय जी, हुजूर सबसे पहले तो मैं नीलोत्पल आपके चरण छू प्रणाम करता हूँ और इसका मुख्य कारण आपका बुज़ुर्ग होना और मेरा भारतीय संस्कारिता में पला बढ़ा होना है,कृपया कम से कम आप इसे भारतीय
आज एक सपना जन्मा था झारखंड के रूप में…

आज एक सपना जन्मा था झारखंड के रूप में…

नया राज्य झारखंड बन चुका था। “आबुआ दिशुम,आबुआ राज” का सपना पुरा हो चुका था। सर उठा के देखा तो आसमान में आश्चर्यजनक रूप से एक इंद्रधनुष बन गया था। नीचे अबीर उड़ रहे थे।सुबह जिस कक्षा मे एक बिहारी के रूप मे घुसा था,अब बाहर आया तो मै झारखंडी हो चुका था। एक आँख बिहार के विरह में भीगी थी, दुसरी में झारखंड के लिए खुशी का पानी था।

काँचही रे बाँस के बहँगिया और उगहुँ सुरूज देब भईल भिनसरवा

काँचही रे बाँस के बहँगिया और उगहुँ सुरूज देब भईल भिनसरवा

कल नहाय खाय के साथ आस्था और पवित्रता का महा- “छठ ” आरंभ हो चुका है। एकदम से लगता है जैसे आदमी से लेकर प्रकृति तक सब “छठ” के रंग मेँ रंगे होँ। लोकपर्व कितने कमाल की बात है साहब
मैं आसमान में धान बो आया हूँ..

मैं आसमान में धान बो आया हूँ..

मैं आसमान में धान बो आया हूँ..   सामान्यतः हवाई यात्राओं पर नहीं लिखता। एक तो ये सोचकर कि, इन हवाई लोगों के लिए क्या जमीन की जुड़ी सोंधी सोंधी बातें जाया करूँ और दूसरा कारण ये रहा है कि,
जमुनिया, जमुनिया, जमुनिया..

जमुनिया, जमुनिया, जमुनिया..

जमुनिया, जमुनिया, जमुनिया..   “जामुन”। बात बड़ी साधारण है कि भला जामुन किसने ना खाया होगा अपनी ज़िंदगी में। पर कभी कभी उसी ज़िंदगी में ऐसे भी पल आते हैं जब आप जामुन को केवल देख सकते हैं, खा नही
“लालटेन”.. घर की रौशनी

“लालटेन”.. घर की रौशनी

“लालटेन”.. घर की रौशनी..   कल आधी रात कुछ समय के लिए लाईट चली गई तो बिस्तर से अंदाजन उठ हाथ  टटोल कर मोमबत्ती खोजने लगा। 5 मिनट किचन में  हाथ टटोलने के बाद एक आधी जली पिघली मोमबत्ती मिली।
लिट्टीलाइजेसन

लिट्टीलाइजेसन

लिट्टीलाइजेसन   “लिट्टी-चोखा” आहा नाम सुनते ही आपके मुँह में पानी आ जाय पर मेरी तो आँखों में पानी भर आता है। मुँह तो मैं आज भी इसके लिए बाये रहता हूँ । एक अनोखी भावुकता है लिट्टी के साथ।
नमस्कार ये आकाशवाणी है

नमस्कार ये आकाशवाणी है

नमस्कार! ये आकाशवाणी है “रेडियो” है आपके पास? जी ये मोबाईल वाला “फैन्सी क्रेजी ढीप ढाप टीप टाप चैँ पौँ  कि कुँ एफ एम रेडियो” की बात नहीं कह रहा हूँ । आज अचानक एक सब्जी वाले ठेले पर रेडियो
पीजिये दारु… इंटेलेक्चुअल जो बनना है

पीजिये दारु… इंटेलेक्चुअल जो बनना है

पीजिये दारु… इंटेलेक्चुअल जो बनना हैं     कल कुछ युवकोँ को युँ ही एक चौराहे के पास “दारू” पीते देखा। सब सिविल की तैयारी वाले छात्र ही थे और राम की रावण पर जीत की विजयादशमी इंजॉय कर रहे
दशहरा.. 4g वाला..

दशहरा.. 4g वाला..

दशहरा.. 4g वाला..   आज दशहरा है। फेसबुक जय माता दी के नारों और माता की तस्वीरोँ से पटा पड़ा है। मैं घनघोर उलझाऊ आस्थावान आदमी हूँ, देवी देवता से डरने वाला आदमी। हर तस्वीर को देख भयंकर श्रद्धा से
अँचार का आचार

अँचार का आचार

अँचार का आचार   अहा “अँचार “.. नाम सुनते ही दाँत सिलसिलाने लगता है और मुँह मेँ इतना पानी भर जाता है कि मानो मुँह मेँ पाताल कुँआ फूट पड़ा हो। अभी गर्मीयोँ का मौसम है और अभी अँचार बनने
“बस स्टैँड” बस.. “स्टैंड” नहीं

“बस स्टैँड” बस.. “स्टैंड” नहीं

“बस स्टैँड” बस.. “स्टैंड” नहीं कभी किसी “बस स्टैँड” पर कुछ घंटे तो बिताया ही होगा आपने! चाहे छोटा शहर हो या बड़ा, बस स्टैँड का माहौल कमोबेश पुरे देश मेँ एक जैसा ही होता है। खुलती जाती आती बसेँ,
देश की सीमा पर जान अड़ाए खड़े सैन्य सपूतों के यश को मत बाँटिये

देश की सीमा पर जान अड़ाए खड़े सैन्य सपूतों के यश को मत बाँटिये

सब करिये, पर इतना करम करिये के देश की सीमा पर जान अड़ाए खड़े सैन्य सपूतों के यश को मत बाँटिये।इनके यश को राजनीती के गिद्धभोज में चटनी की तरह मत बाँट दीजिये। हम आप तो सदा किसी न किसी
बिना पाउडर प्राईम टाईम से अलग रविश जी को देखिये, वो चमक नही रहती

बिना पाउडर प्राईम टाईम से अलग रविश जी को देखिये, वो चमक नही रहती

पाउडर” लगाते हैँ आप? “पाउडर” लगाते हैँ आप? या तो लगाते होँगेँ या कभी जरूर लगाया होगा।पाउडर का महत्व और प्रयोग आदिकाल से होता आ रहा है। देवोँ के देव महादेव को भी भस्म रूपी पाउडर लगाना प्रिय रहा है।
रेलगाड़ी..एक दिन का घर

रेलगाड़ी..एक दिन का घर

रेलगाड़ी..एक दिन का घर “रेलगाड़ी” मेरे जीवन मेँ एक शिक्षक,एक संस्थान,एक गाईड की तरह है। मैँने न जाने देश दुनिया के कितने रंग इसी रेलगाड़ी मेँ देखे और न जाने कितनी बातेँ जानी सीखी और न जाने कितने दर्शन समझे।मैँ
शनिदेव- तेल का खेल, वेद पुराण फेल

शनिदेव- तेल का खेल, वेद पुराण फेल

शनिदेव- तेल का खेल, वेद पुराण फेल हड़प्पा काल मेँ सबसे परम पद शिव को प्राप्त हुआ, वैदिक काल मेँ इंद्र देव और प्रजापति देवता का जलवा कायम रहा और फिर गुप्त काल से शुरू हो सदियोँ तक देखिए तो
हिंदी की तेरहवीँ का वार्षिक उत्सव

हिंदी की तेरहवीँ का वार्षिक उत्सव

हिंदी की तेरहवीँ का वार्षिक उत्सव आज पुनः हिंदी की तेरहवीँ का वार्षिक उत्सव है,यानि चौदह सितंबर। हिंदी को श्रद्धा से याद करने का दिन,एकाध पोस्ट और अखबारोँ मेँ लेख-निबंध से तर्पण करने का दिन। हिंदी थी मेरे देश की बिँदी टाईप
आपकी भागीदारी