ग्लोबल गुमटी

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राड़, सांड़, सोढ़ी, संन्यासी, इनसे बचे सो सेवै काशी..बनारस डायरीज 1

राड़, सांड़, सोढ़ी, संन्यासी, इनसे बचे सो सेवै काशी..बनारस डायरीज 1

कुछ है बनारस में कि अब बड़े बड़े चमचमाते मॉल आ गए हैं, जगह जगह इडली के स्टाल लग गए हैं पर बनारस है कि कशी की लंगोट को छोड़ता ही नहीं। यह बनारस ही है, जहां गंगा की धारा उलट गई, आम लंगड़ा हो गया, बातें बतरस में बदलकर किस्से और कहावत में बदल गयीं

ये आज के सच की तस्वीर है…

ये आज के सच की तस्वीर है…

कैश के लिए बैंक की लाइन से अपना नंबर हट जाने पर ये बुजुर्ग वहीं खड़े-खड़े ही रोने लगा। सोशल मीडिया पर यह तस्वीर वायरल हो गई है और नोटबंदी का एक सच दिखाती है

एक चिठ्ठी उनके नाम जिन्हें मैंने कभी देखा ही नहीं

एक चिठ्ठी उनके नाम जिन्हें मैंने कभी देखा ही नहीं

तुम्हारी याद आ जाती है जब कोई अपनी नानी का ज़िक्र करता है और उस याद में तुम दिखती हो माँ जैसी, लाल साड़ी पहने, सर पर पल्ला डाले, माथे पर बड़ी सी लाल बिंदी…न तुम सिर्फ बहुत जल्दी इस दुनिया से चली गयी पर “पता है मेरी नानी कहती है” वाली मेरी कहानियाँ भी अपने साथ ले गयी.

अपने प्रयोग पर था इतना भरोसा कि चख लिया पोटेशियम साइनाइड

अपने प्रयोग पर था इतना भरोसा कि चख लिया पोटेशियम साइनाइड

उन्होने एक पौधे पर पोटेशियम साइनाइड का प्रयोग किया किन्तु पौधा मुरझाने की बजाय और अधिक खिल उठा. पर उन्हें अपने प्रयोग पर गहरा भरोसा था. इस भरोसे को साबित करने के लिए उन्होने उस पदार्थ को उठाकर चख लिया. ये देखकर वहां बैठे रॉयल सोसाइटी के वैज्ञानिकों की चीख निकल गयी…

जो दिल न लगे उसे कह दो बाय बाय #DearZindagi

जो दिल न लगे उसे कह दो बाय बाय #DearZindagi

Dear Zindagi जरुर देखिये अगर आपका कोई अपना,कोई दोस्त,साथी,परिवार में कोई भी डिप्रेशन से गुजर रहा है.दवाओं को अपना काम करने दीजिये आप बस पंख लगा दीजिये उसे..

रौनक़ें जितनी यहाँ हैं कुछ औरतों के दम से हैं – इंदिरा गाँधी

रौनक़ें जितनी यहाँ हैं कुछ औरतों के दम से हैं – इंदिरा गाँधी

दरवाजे पर खड़े सब-इंस्पेक्टर बेअंत सिंह ने उनका अभिवादन किया और दरवाजा खोला. जैसे ही श्रीमती गाँधी आगे बढीं, उसने अपनी पिस्टल निकाली और एक मीटर से भी कम फासले से उन पर दनादन गोलियां बरसाने लगा . श्रीमती गाँधी “अरे यह क्या…???” कहती हुई जमीन पर गिर पड़ी

#DearZindagi …….एक बात कहें तुमसे

#DearZindagi …….एक बात कहें तुमसे

Dear Zindagi का ट्रेलर देखा, एक ज़िन्दगी से कन्फ्यूज्ड लड़की के रोल में अलिया जिसे उसकी भाषा में कहूँ तो “रिलेशनशिप इश्यूज “ हैं उसके life कोच के करैक्टर में शाहरुख़ की कहानी सन्डे की अलसाई दोपहर जैसी लगती है-बिना
लड़कियों तुम ज्योमेट्री बॉक्स नहीं हो, हर रूप में तुम खूबसूरत हो

लड़कियों तुम ज्योमेट्री बॉक्स नहीं हो, हर रूप में तुम खूबसूरत हो

इन्टरनेट  ने अगर दुनिया को हमारे क़दमों में पहुँचाया है तो हम सभी को एक कम्पटीशन में ला कर खड़े भी कर दिया है. यहाँ रेस लगी हुई है, एक दुसरे से बेहतर होने की रेस. और इसी ने ला
तुम्हें लगा सिर्फ मोदी जी ने ट्रम्प कार्ड निकाला

तुम्हें लगा सिर्फ मोदी जी ने ट्रम्प कार्ड निकाला

काले धन पर कल के सर्जिकल स्ट्राइक से अभी सब उबरे नहीं थे, सुबह दूध वाला, सब्जी वाला से झिक झिक चल ही रही थी कि अमेरिका ने दूसरा ट्रम्प कार्ड खेल दिया। यूएस प्रेसिडेंशियल इलेक्शन में रिपब्लिकन डोनाल्ड ट्रम्प
500 और 1000 के नोट बंद करने के निर्णय के तथ्य बिन्दुवार

500 और 1000 के नोट बंद करने के निर्णय के तथ्य बिन्दुवार

कालेधन पर आज एक महत्त्वपूर्ण फैसला लेते हुये केंद्र सरकार ने 500 और 1000 रुपये के नोट बंद करने का ऐलान किया है। आपको बता दें कि ये नियम आज आधी रात से लागू हो जाएगा। जिनके पास 500 और
मुझसे मेरी राज सी मुहब्बत.. मेरे महबूब न मांग

मुझसे मेरी राज सी मुहब्बत.. मेरे महबूब न मांग

मुझसे मेरी राज सी मुहब्बत.. मेरे महबूब न मांग..   शाहरुख़ खान – आज तुम्हारा दिन है जब तुम केक काटो और लोग कोरस में गायें “हैप्पी बर्थडे टू यू” और फिर 90% जनता को इसके आगे का गाना नहीं
तुम रह गयी मेरी हर डायरी के पहले पन्ने में हमेशा के लिये

तुम रह गयी मेरी हर डायरी के पहले पन्ने में हमेशा के लिये

मेरी अमृता आज के दिन तुम इस दुनिया को छोड़ कर चली गयी, शाम को टीवी में देखा कि “लेखिका अमृता प्रीतम का निधन ” तो कुछ अटक गया गले में, बाथरूम गयी और रो पड़ी, बहुत देर तक रोती
सफ़र का रैन बसेरा :कुछ खूबसूरत लोग (नेपाल डायरीज 2)

सफ़र का रैन बसेरा :कुछ खूबसूरत लोग (नेपाल डायरीज 2)

सफ़र का रैन बसेरा………………कुछ खूबसूरत लोग   आप कभी अपने किसी भी यात्रा को याद करिये, एक मस्त हॉलिडे को, किसी “अमेजिंग” रोड जर्नी को ………याद किया? तो क्या बनाता है किसी भी यात्रा को ख़ास ? बिलकुल सही, साथ
पापा अमृता प्रीतम से डरते हैं..

पापा अमृता प्रीतम से डरते हैं..

पापा अमृता प्रीतम से डरते हैं.. मेरे घर में मेरा एक कमरा है,और जब से मुझे एक अलग कमरा मिला है, अमृता प्रीतम मेरे कमरे में मौजूद हैं या फिर ये कहूँ कि अमृता के कमरे में मैं मौजूद हूँ
एक करवा चौथ ऐसा भी..

एक करवा चौथ ऐसा भी..

एक करवा चौथ ऐसा भी..   करवा चौथ की भरपूर रौनक है. पूरा बाज़ार अटा पड़ा है पूजा की थालियों, फूल, मिठाई, सजावट , रंग बिरंगे कपड़ों  और हर कोने पर बैठे मेहंदी वालों से. पूर्णिया में हूँ, बोर हो
मेरी मिट्टी में पड़ी एक सूखी जड़ की कहानी

मेरी मिट्टी में पड़ी एक सूखी जड़ की कहानी

मेरी मिट्टी में पड़ी एक सूखी जड़ की कहानी   मेरा मोहल्ला अब बूढ़ा हो चला है. ये तब की बात है जब भिलाई, मध्य प्रदेश का हिस्सा हुआ करता था. औद्योगिक नगर भिलाई बहुत पहले ही समय की दौड़
मैं तुम्हारा साहिर होना चाहता हूँ

मैं तुम्हारा साहिर होना चाहता हूँ

मैं तुम्हारा साहिर होना चाहता हूँ.. वो दोनों मिले और सब कुछ सपने सा था. बेतकल्लुफी के रास्ते एक रिश्ता लिखा जा रहा था छंदमुक्त कविता की तरह. जब नींद किसी के एहसास में सिमटती थी और सुबह उसकी रौशनी
कैंटीन का उधार न चुकाने से निकला किशोर का ये क्लासिक अंदाज़

कैंटीन का उधार न चुकाने से निकला किशोर का ये क्लासिक अंदाज़

कैंटीन का उधार न चुकाने से निकला किशोर का ये क्लासिक अंदाज़..   हम गैंगटोक से पेल्लिंग के रास्ते पर हैं, पहाड़ी रास्तों से होता हुआ यह टूटा फूटा रास्ता अँधेरे में हमें डरा रहा है, मारे डर के हमारे
चिट्ठी न कोई संदेस, जाने वो कौन सा देस.. जहाँ तुम चले गये

चिट्ठी न कोई संदेस, जाने वो कौन सा देस.. जहाँ तुम चले गये

जगजीत सिंह को याद करते हुए  ये बात 1965 की है, जब मुंबई, बॉम्बे हुआ करता था। जगजीत सिंह नाम का एक 21 बरस का लड़का पठानकोट एक्सप्रेस से विक्टोरिया टर्मिनल स्टेशन पर उतरा और एलफिंस्टन रोड स्टेशन पर एक
पर डायरी, मेरी आखिरी विश जानती हो क्या है?

पर डायरी, मेरी आखिरी विश जानती हो क्या है?

पर डायरी, मेरी आखिरी विश जानती हो क्या है?   डियर डायरी  पता है क्या हुआ आज ? मेरे कमरे में आकर माँ पापा मेरे पास बहुत देर तक बैठे रहे। पापा मेरी फेवरिट आइसक्रीम लेकर आये थे और हम
​और एक दिन लखनऊ से………..अवध की मुलाकात

​और एक दिन लखनऊ से………..अवध की मुलाकात

और एक दिन लखनऊ से…………अवध की मुलाकात   “आज तड़के सुबह ही नींद खुल गयी, सुबह हलकी ठण्ड रहती है तो जोड़ों में दर्द उठता है. उठकर सोचती हूँ कि चाय बना लूँ. चीनी ख़त्म होने को है, ये चीनी
होली तो होती थी हमारे ज़माने में हमारे पांडेपुर में.. एकदम टन-टन होली

होली तो होती थी हमारे ज़माने में हमारे पांडेपुर में.. एकदम टन-टन होली

                                                  आजकल की होली आजकल की होली भी कोई होली है, एक होली मिलन का गेट
क्योकि पुराने कलकत्ता को पता है कि

क्योकि पुराने कलकत्ता को पता है कि

कोलकाता के रास्ते कलकत्ता की ओर कोलकाता (kolkata)– जिसको हमारे बचपन ने कलकत्ता के नाम से जाना है| पहली बार जाना हुआ वहां| एयरपोर्ट से निकलकर वो पीली टैक्सियाँ जो कलकत्ता की ट्रेडमार्क पहचान हैं| और आगे जाने पर दिखती
क्यूंकि मेरी नज़रों से वो नंगी,पागल औरत नहीं जाती एक पल के लिये भी

क्यूंकि मेरी नज़रों से वो नंगी,पागल औरत नहीं जाती एक पल के लिये भी

मुझे शिकायत है तुम्हारे भगवान से   NH 27 पर जा रही थी उदयपुर से माउंट आबू के रास्ते, जब रास्ते में मुझे वो दिखी. आज भी उसके बिखरे हुए बाल, शरीर पर मांस की एक पतली लेयर और उसके
कुछ नये दोस्त, ढेर सारी तस्वीरें और एक चुटकी ज़िन्दगी

कुछ नये दोस्त, ढेर सारी तस्वीरें और एक चुटकी ज़िन्दगी

ऐ ज़िन्दगी तुम पहाड़ जैसी हो, तो पहाड़ क्यूँ नहीं …नेपाल डायरीज -1 नेपाल डायरीज-1 -बस अचानक ही बैठे बैठे नेपाल का प्रोग्राम बन गया. लम्बा वीकेंड था, हमें कहीं जाना था, बिहार में हैं तो सोचा चलो नेपाल चलते
सविता भाभी और हमारे ऊपर थोपी हुई संस्कारिता

सविता भाभी और हमारे ऊपर थोपी हुई संस्कारिता

सविता भाभी और हमारी हिपोक्रिसी हाल ही में खबर आई की पहलाज निहलानी वाले सेंसर बोर्ड ने फिल्म बार बार देखो में सविता भाभी के ज़िक्र वाले एक सीन पर कैंची चला दी है. आप पोर्न साइट्स पर बैन लगाइये,
बनारस, मसान और मैं

बनारस, मसान और मैं

बनारस, मसान और मैं एक दिन मसान देखी और किसी को समझा नहीं पाऊँगी इसे देखने का आफ्टर इफ़ेक्ट.जो मुझे करीब से जानते हैं, वो बनारस से मेरे spiritual attachment से वाकिफ हैं। कोई कहानी लिखती हूँ तो वह किसी
घर से दूर उन खूबसूरत लड़कियों के नाम…….शुक्रिया तनिष्क

घर से दूर उन खूबसूरत लड़कियों के नाम…….शुक्रिया तनिष्क

शुक्रिया तनिष्क हाल ही में तनिष्क ने अपने ज्वेलरी ब्रांड Mia का नया advertisement निकाला. बहुत ही खूबसूरती से एक कविता के धागों से पिरोया गया यह ad बताता है कि इन काम करती औरतों के लिये कुछ चीज़ें बिलकुल
खिड़की के पार एक गुड़िया

खिड़की के पार एक गुड़िया

खिड़की के पार एक गुड़िया खिड़की – बचपन में मैं हमेशा खिड़की पर बैठी एक लड़की को देखती थी, गुड़िया जैसी, एक जगह बैठे, वह हिल नहीं सकती थी, कमर के नीचे लकवा लग गया था पर यह मुझे नहीं
माँ आप मुझे ये एक रुपया रोज़ क्यों देती हो

माँ आप मुझे ये एक रुपया रोज़ क्यों देती हो

कुआँ पूजन “माँ आप मुझे ये एक रुपया रोज़ क्यों देती हो ” रिमी ने एक रूपये का सिक्का हाथ में भींचते हुए कहा .माँ ने बेटी को पुचकारते हुए कहा “शाम को जब आप दादी के साथ कीर्तन में
आपकी भागीदारी