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Best Films world war 2

द्वितीय विश्वयुद्ध पर बनी बेहतरीन फ़िल्में: पार्ट 1

मानव इतिहास के सबसे खूनी संघर्ष द्वितीय विश्वयुद्ध (2nd World war) पर बनी विश्व सिनेमा की सबसे बेहतरीन फिल्मों की शृंखला की पहली कड़ी के रूप में हम पेश कर रहे हैं वैसी फिल्मों की सूची जिसमें युद्ध की विभीषिका का सबसे जीवंत और रोमांचकारी  चित्रण किया गया है|
  • Saving Private Ryan (1998) 

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        निर्देशन – Steven Speilberg.
        अभिनय – Tom Hanks, Matt Damon.

दूसरा विश्वयुद्ध जून 1944 में नोरमंडी की प्रसिद्ध लड़ाई के अपने निर्णायक अंतिम चरण में पहुँच गयी  थी| अब मामला आमने सामने का था और दोनों पक्षों ने अपनी पूरी ताकत इसी लड़ाई में झोंक दी थी| इसी लड़ाई में जेम्स रेयान नाम का एक अमेरिकी साधारण सैनिक किसी मोर्चे पर लड़ रहा है| जेम्स के तीन भाई युद्ध में मारे जा चुके हैं|युद्ध में रहने के कारण जेम्स को इसकी खबर नहीं है कि अपनी माँ के चार बेटों में से अब वह अकेला ही बच गया है| अमेरिकी सेनाध्यक्ष को जब उसकी माँ के इस दुःख का पता चलता है तो कैप्टन मिलर (टॉम हैंक्स) के नेतृत्व में आठ सैनिकों के एक दल को चारों तरफ फ़ैली अफरा तफरी के बीच जेम्स रेयान को खोज निकालने और उसे अमेरिका में उसकी माँ तक वापस पहुँचाने का काम सौंपा गया| यह फिल्म जेम्स रेयान की तलाश के उसी मिशन की कहानी दिखाती है|

 भीषण युद्ध की अमानवीय परिस्थिति में भी ज़िंदा बच रही मानवीय भावनाएं बड़ी सुन्दर दिखती हैं| युद्ध के बहुत यथार्थ और जीवंत फिल्मांकन और मुश्किल हालात में एक टुकड़ी का नेतृत्व कर रहे कैप्टन मिलर के रूप में टॉम हैंक्स के अभिनय के लिए यह फिल्म दर्शनीय है|

       

  • Enemy at the gates (2001)

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    निर्देशन – Jean-Jacques Annaud.
   अभिनय  – Jude Law, Ed Harris, Joseph Fiennes, Rachel Weisz.

वसीली (Jude law) रूसी सेना का एक साधारण सिपाही है| जर्मन सेना के साथ एक लड़ाई में जब उसकी पूरी टुकड़ी तबाह हो जाती है तो उसी दिन उसे अपने अचूक निशाने की प्रतिभा का पता चलता है जिससे वह अपनी और अपने अफसर की जान बचाता है| इसके बाद वह रूसी सेना का स्टार स्नाइपर बन जाता है और स्तालिनग्राद के मोर्चे पर जर्मनों में खूब तबाही मचाता है| उसे ख़त्म करने के लिए जर्मन सेना अपने सबसे अनुभवी पर बूढ़े और चूका हुआ मान लिए गए स्नाइपर मेजर कोनिग (Ed Harris) को भेजती है| एक दुसरे को मारने के लिए इन दोनों स्नाइपरों के बीच कई दिनों तक चली मोर्चेबंदी, दांव-पेंचो, मनोविज्ञान और निशानेबाजी के अद्भुत जौहर ये फिल्म दिखाती है| इसके अलावा इस फिल्म में प्रेम, प्रेम त्रिकोण, इर्ष्या, दोस्ती, सहस और बलिदान जैसे रंग भी ख़ूबसूरत तरीके से सजाये गए हैं|

फिल्म अंत में ये छाप छोड़ती है कि युद्ध में खेला सिर्फ बंदूकों से ही नहीं, दुश्मन के दिमाग से भी जाता है| कई सिनेमा के दीवानों की नजर में स्नाइपर पर बनी यह अब तक की सबसे बेहतरीन फिल्म है| युद्ध के समय मनोविज्ञान कैसे काम करता है इसका तसल्लीबख्श प्रदर्शन फिल्म में किया गया है|

 

  • Das boot (1981), जर्मन भाषा

    Image source - xspace.talaweb.com
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   निर्देशन Wolfgang Petersen
   अभिनय – Jurgen Prochow, Herbert Gronemeyer.

1942 में जर्मन और ब्रिटिश नौसेना अटलांटिक सागर पर कब्जे के लिए बुरी तरह लड़ रही थी| युद्ध की शुरुआत में जर्मनों को भारी बढ़त दिलाने वाले यू-बोट्स अब ब्रिटिश नौसेना के जंगी जहाजों से पिछड़ने लगे थे| यह फिल्म एक कमजोर हो चुके ऐसे ही यू-बोट और उसके सदस्यों द्वारा राष्ट्र के गौरव और सरकार के आदेश के पालन के लिए पूरी तरह प्रतिकूल परिस्थितियों में भी एक असंभव से मिशन में जूझने के जज्बे की कहानी है|

पानी के नीचे और आदमी के मन के अंदर जो चलता है वो दुनिया की नजरों से परे होता है पर दबाव यहाँ कहीं ज्यादा होता है ये बात फिल्म देखने के बाद मन में अच्छे से घर कर जाती है| साउंड इफेक्ट, फिल्मांकन और अभिनय से अंतिम दृश्य में जिस तरह का तनाव पैदा किया गया है वह आपकी  हथेलियों में आपकी कुर्सी के हत्थे जकड़वा देगा जो फिल्म ख़तम होने के बाद भी जरा देर में छूटेगा|

  • The great escape (1963)

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    Image source  – aambar.wrodpress.com
  निर्देशन – John struges.
 अभिनय – Steve McQueen, James Garner, Richard Attenborough.

ये फिल्म एक सच्ची घटना पर आधारित है| अपने अपने कैदी शिविरों से भागने का प्रयास कर चुके मित्र राष्ट्रों के कई युद्धबंदी सैनिकों को एक कैम्प में ला कर रख दिया जाता है जहाँ से भाग पाना नामुमकिन की हद तक मुश्किल है| पर यहाँ वे सभी मिलकर सैकड़ों की संख्या में युद्ध बंदियों को भगाकर जर्मन कब्जे वाले यूरोप से बाहर निकालने की योजना पर काम करते हैं| फिल्म के पहले भाग को कॉमेडी से मनोरंजक बनाया गया है पर दूसरा भाग जिसमें भागने की योजना को अंजाम दिया जाता है हद दर्जे का रोमांचक बन पड़ा है| इस फरारी में नाव, रेल और हवाई जहाज सबका प्रयोग दिखाया गया है| इसी फिल्म से प्रेरित होकर 2007 में हिन्दी फिल्म 1971 आई थी जो ज्यादा प्रचारित नहीं हुई पर मनोज वाजपेयी, दीपक डोबरियाल, मानव कौल और कुमुद मिश्रा जैसे कलाकारों के बेहतरीन अभिनय और कई रोमांचक दृश्यों  से यह युद्ध आधारित बेहतरीन हिन्दी फिल्मों की लिस्ट में बहुत ऊपर आयेगी|

फिल्म ये सन्देश देती है कि स्वंत्रता का प्रयास अपनी पराजय में भी हमेशा गौरवपूर्ण होता है| युद्धबंदियों में आजादी की चाहत और उसके लिए दुस्साहस के रोमांच को अनुभव कराने में फिल्म सफल रहती है| 60 के दशक के कई बड़े और प्रतिभाशाली अभिनेताओं जैसे Steve McQueen, Richard Attenborough, Charles Bronson और James Coburn को एक फिल्म में इकठ्ठा देखने का मौका यह फिल्म देती है|

  • The Dam busters (1955)

    Image source - Dambusters.wordpress.com
    Image source – Dambusters.wordpress.com
निर्देशन – Michael Anderson
अभिनय – Richard Todd, Michael Redgrave, Ursula Jeans.

युद्ध में जर्मनी की बढ़त का एक बड़ा कारण था जर्मनी का औद्योगिक उत्पादन| रूर नदी घाटी में एक डैम को उड़ा देने से उस क्षेत्र में मौजूद जर्मनी के बड़े उद्योग तबाह हो जाते और जर्मनी की रीढ़ टूट जाती| पर जर्मनों को भी अपने इस डैम के महत्व का पता था और इसकी सुरक्षा का तगड़ा बंदोबस्त रखा गया था| कोई भी जहाज इसके नजदीक आने के पहले ही उड़ा दिया जाता| डैम को ध्वस्त करने के लिए जरूरी था कि इसकी बुनियाद पर बम से हमला किया जाए, ब्रिटिश वायु सेना के पास इसकी कोई उम्दा तकनीक नहीं थी| ऊपर से ये डैम संकरी पहाड़ी घाटी में मौजूद था जिसमें जहाजों का नीची उड़ान भरना जर्मन मशीनगनों की जद में आने जितना ही आत्मघाती था| ब्रिटिश सेना की इस योजना को सफल बनाने के लिए एक सनकी वैज्ञानिक और एक अनुभवी जांबाज फाइटर पाइलट एक साथ आते हैं और नीची उड़ान भरकर एकदम सटीक समय और सटीक दूरी पर पानी में एक के बाद एक बम गिराने की योजना पर काम करते हैं|

ये फिल्म साबित करती है कि साइंस और साहस की जुगलबंदी से असंभव भी संभव हो सकता है| एक हैप्पी एंडिंग के लिए लगातार असफलताओं से गुजरने का धैर्य हो तो ये फिल्म देख सकते हैं|

  • Letters from Iwo jima (2006)

    Image Source - Youtube.com
    Image Source – Youtube.com
निर्देशन – Clint Eastwood
अभिनय – Ken Watanabe एवं अन्य

Iwo Jima द्वीप अमेरिकी सेना और जापान के बीच वो अंतिम मोर्चा था जिसके ढहने का मतलब था जापानी मुख्यभूमि पे अमेरिकी सेना का प्रवेश और जापान के लिए युद्ध का पराजय में समापन| इस स्थिति ने Iwo Jima को जापान का नोरमंडी बना दिया था जहाँ दोनों पक्षों ने अपनी पूरी ताकत लगा दी थी और यहाँ बहुत खूनी लड़ाई हुई थी| Clint Eastwood ने एक ही साल में एक ही साथ इस लड़ाई पर दो फ़िल्में बनाई| एक Flag of our Fathers जो अमेरिकी दृष्टि से इस युद्ध को दिखाती है और दूसरी ये फिल्म इस लड़ाई को लेकर जापानी नजरिया दिखाती है| Eastwood ने दोनों फिल्मों में अपनी निष्पक्षता बरक़रार रखने की भरसक कोशिश की है|

फिल्म का अंतिम निष्कर्ष है कि युद्ध में पराक्रम और क्रूरता का निर्धारण इस बात से होता है कि कहानी सुनाने वाला किस पक्ष का है|जापानियों की क्रूरता के लिए जाने गए एक एतिहासिक युद्ध का जापानी दृष्टिकोण दिखाने के Clint Eastwood के इमानदार प्रयास के लिए यह फिल्म देखी जानी चाहिए|

  • The great Raid (2005)

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निर्देशन – John Dahl.
अभिनय  – Benjamin Bratt, Joseph Fiennes, James Franco.

1945 में जब विश्वयुद्ध अपने अंतिम दौर में पहुँच गया था, फिलीपींस में स्थित कुख्यात जापानी Cabantuan युद्धबंदी शिविर में 500 अमेरिकी सैनिक कैद थे| एक अमेरिकी बटालियन स्थानीय जापान विरोधी गुरिल्ला लड़ाकों की सहायता से उन्हें छुड़ाने का मिशन हाथ में लेती है| इस मिशन में उन्हें दुश्मन के क्षेत्र के अन्दर जंगलों में 30 मील की यात्रा बिना दुश्मन के नजर में आये करनी है|

फिल्म यह अहसास कराती है कि साहस के सबसे चमकदार कारनामे अंधेरों में छिपे पड़े हैं| युद्धबंदियों को छुड़ाने के मिशन पर बनी यह सबसे रोमांचक फिल्मों में से एक है| फिल्म की एक विशेषता जेम्स फ्रैंको की उम्दा साइलेंट एक्टिंग भी है|

  • Downfall (2004)

    Image source - Subscene.com
    Image source – Subscene.com
मूलतः – Der Untergang , भाषा – जर्मन
 निर्देशन – Oliver Hirschbiegal.
 अभिनय – Bruno ganz, Alexandra Maria Lara.

लाचार, निराश और थका-हारा महसूस करते हिटलर की कल्पना कभी की है? अगर बहुत कोशिश करने के बाद भी हिटलर के का यह रूप मन में चित्र ग्रहण नहीं कर पा रहा तो इस फिल्म के निर्देशक Oliver Hirschelbiegal की दाद दीजिये जिन्होंने 2 घंटे और 36 मिनट के लिए ऐसे हिटलर को परदे पर खड़ा कर दिया है| यह फिल्म हिटलर के अंतिम समय में उसकी सेक्रेटरी रही Traudl Junge के अनुभवों के आधार पर और उन्ही के नजरिये से दिखाई गयी है| जब पश्चिम और पूर्व दोनों तरफ से मित्र राष्ट्रों की सेनाएं तेजी से और बिना किसी विशेष प्रतिरोध का सामना किया आगे बढ़ी आ रही थीं और बर्लिन का पतन अब बस किसी भी समय की बात थी तो हिटलर के बंकर और खुद हिटलर के मन और जीवन में क्या कुछ घटित हो रहा था इसे यह फिल्म बहुत प्रभावशाली तरीके से दिखाती है| जहाँ एक ओर हिमलर जैसे उसके सबसे वफादार और शक्तिशाली सिपाहसलार अपने प्राण बचाने के लिए उसके आदेशों की अवहेलना करना शुरू कर देते हैं वहीं उसी बंकर में जोसफ गोब्बेल्स जैसे साथी भी हैं जो हिटलर के साथ ही ख़त्म होने का संकल्प लिए अंतिम समय तक उसे नहीं छोड़ते| इन सबके बीच हिटलर की प्रेमिका इवा ब्राउन भी है जो मुस्कराते हुए सबका ख्याल रखती है और बंकर के अन्दर के मृत्यु जैसे अवसाद वाले वातावरण में जीवन्तता की एकमात्र लौ के रूप में नजर आती है| हिटलर को चिंता और सोच के खोल में सिमटा दिखाया गया है जो एक पल में आशावाद से भर उठता है तो दुसरे ही क्षण आत्महंता अवसाद में घिर जाता है| इन सब के दौरान हिटलर के कई ऐसे रूप दिखाए गए हैं जो उसके बारे में हमारी बनी हुई धारणा से कहीं परे ले जाकर चौंकाती है|

फिल्म हिटलर के बंकर से कभी कभार ही बाहर निकली है और युद्ध के दृश्य तो बेहद ही कम हैं| पर फिर भी बंकर के अन्दर के जीवन की महीन पड़ताल आपको बांधे रखती है| कहते हैं मुग़ल-ए-आजम में पृथ्वी राज कपूर के अन्दर अकबर की आत्मा आ बसी लगती है, अगर ये संभव होगा तो जरूर हिटलर की आत्मा भी उसका रोल निभा रहे एक्टर Bruno Ganz में इस फिल्म के दौरान घर कर गयी है| उनकी एक्टिंग इस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत कहलायेगी| अपनी सोच में डूबा सर झुकाए बंकर में टहलता, अवसाद में मतिभ्रम की स्थिति तक पहुँच गया लगता और अपने अधिकारियों को डांटते समय गुस्से से थूक उड़ाते हिटलर का अभिनय इतना जीवंत है कि शायद खुद हिटलर भी एक पल के लिए असली और अभिनेता के बीच फर्क करने में भूल कर जाए| ये फिल्म की सशक्त क्षमता ही है कि आप अंत में हिटलर जैसे चरित्र के लिए भी दिल में थोड़ा दुःख तो महसूस करते ही हैं|  Bruno Ganz के यादगार अभिनय और अंतिम दिनों में अपना पतन तय जान रहे एक साधारण आदमी के रूप में हिटलर को देखने के लिए यह फिल्म देख सकते हैं|

क्रमशः….

 निशीथ सिंह 

2 Comments on “द्वितीय विश्वयुद्ध पर बनी बेहतरीन फ़िल्में: पार्ट 1

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