ग्लोबल गुमटी

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ओम पुरी को याद करते हुए

ओम पुरी को याद करते हुए

अपने अंतिम दिनों में पत्नी नंदिता से तलाक,भारतीय सेना को लेकर टिप्पणी और फिर माफ़ी,अकेलेपन से अवसाद और फिर लगातार शराब के लत ने ओम पुरी को तोड़ कर रख दिया था.

जो दिल न लगे उसे कह दो बाय बाय #DearZindagi

जो दिल न लगे उसे कह दो बाय बाय #DearZindagi

Dear Zindagi जरुर देखिये अगर आपका कोई अपना,कोई दोस्त,साथी,परिवार में कोई भी डिप्रेशन से गुजर रहा है.दवाओं को अपना काम करने दीजिये आप बस पंख लगा दीजिये उसे..

एक थी टुनटुन…

एक थी टुनटुन…

महिला हास्य कलाकारों में कोई आज तक टुनटुन के बराबर नहीं पहुँच सकी. वजनदार शरीर को उन्होंने वजनदार अभिनय से अपनी ताकत बना लिया….

नए सिनेमा की नयी तस्वीर – हमारा नवाज

नए सिनेमा की नयी तस्वीर – हमारा नवाज

हमारा नवाज़! सिनेमा के परदे पर, हर चेहरा चमकता है। कुछ ही चेहरे होते हैं जिनको देखकर आंखों में चमक आती है। लगता है कि यार, सामने जो ऐक्टिंग कर रहा है, बंदा मुझ-सा ही दिखता है। नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी- Nawazuddin
कन्नड़ फिल्म अभिनेताओं की मौत ने उठाए गंभीर सवाल

कन्नड़ फिल्म अभिनेताओं की मौत ने उठाए गंभीर सवाल

कन्नड़ फिल्म ‘मस्तीगुडी’  की शूटिंग के दौरान तीन कन्नड़ अभिनेताओं को छलांग लगाने को कहा गया और उनमें दो को तो बिना लाइफ जैकेट के ! मुख्य अभिनेता विजय के पास लाइफ जैकेट थी और वह तो बच गए पर
द्वितीय विश्वयुद्ध पर बनी बेहतरीन फ़िल्में: पार्ट 1

द्वितीय विश्वयुद्ध पर बनी बेहतरीन फ़िल्में: पार्ट 1

मानव इतिहास के सबसे खूनी संघर्ष द्वितीय विश्वयुद्ध (2nd World war) पर बनी विश्व सिनेमा की सबसे बेहतरीन फिल्मों की शृंखला की पहली कड़ी के रूप में हम पेश कर रहे हैं वैसी फिल्मों की सूची जिसमें युद्ध की विभीषिका का
ये रहे पुरानी फिल्मों के वो डायलॉग्स जो आज भी लोगों की जुबान पर चढ़े हुए हैं

ये रहे पुरानी फिल्मों के वो डायलॉग्स जो आज भी लोगों की जुबान पर चढ़े हुए हैं

तीन दशक भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में ऐसे गुजरे जो अपनी कुछ ख़ास पहचान के लिए हमेशा जाने जायेंगे. ये दशक थे- सत्तर, अस्सी और नब्बे के. उस दौर की फिल्मों के डायलॉग्स आज भी लोगों की जुबान पर चढ़े हुए हैं
बहुत हो गई पहलवानी अब दंगल होगा

बहुत हो गई पहलवानी अब दंगल होगा

बहुत हो गई पहलवानी अब दंगल होगा.. दंगल फिल्म के डायलॉग को हमें इस फिल्म की पृष्ठभूमि वाले  इलाके यानी हरियाणा के संदर्भ में देखना होगा. पहलवानी और कुश्ती का शौक तो यहां के खेतों की मिट्टी जितना पुराना होगा
कैंटीन का उधार न चुकाने से निकला किशोर का ये क्लासिक अंदाज़

कैंटीन का उधार न चुकाने से निकला किशोर का ये क्लासिक अंदाज़

कैंटीन का उधार न चुकाने से निकला किशोर का ये क्लासिक अंदाज़..   हम गैंगटोक से पेल्लिंग के रास्ते पर हैं, पहाड़ी रास्तों से होता हुआ यह टूटा फूटा रास्ता अँधेरे में हमें डरा रहा है, मारे डर के हमारे
इन आँखों की मस्ती के…

इन आँखों की मस्ती के…

इन आँखों की मस्ती के… मस्ताने हजारो थे.. है.. और रहेंगे..     14 वर्षीय साँवली और भरे गालों वाली एक लड़की भानुरेखा, लाइट्स की चकाचौंध के बीच खड़ी है, दृश्य है 5 मिनट्स लंबे चुम्बन को फिल्माने का. एक
चिट्ठी न कोई संदेस, जाने वो कौन सा देस.. जहाँ तुम चले गये

चिट्ठी न कोई संदेस, जाने वो कौन सा देस.. जहाँ तुम चले गये

जगजीत सिंह को याद करते हुए  ये बात 1965 की है, जब मुंबई, बॉम्बे हुआ करता था। जगजीत सिंह नाम का एक 21 बरस का लड़का पठानकोट एक्सप्रेस से विक्टोरिया टर्मिनल स्टेशन पर उतरा और एलफिंस्टन रोड स्टेशन पर एक
बुनियाद के बहाने

बुनियाद के बहाने

धारावाहिक का एक पात्र धारावाहिक का एक पात्र जब जब कैंसर से मरने की कगार पर होता है तब टाटा मेमोरियल कैंसर अस्पताल के एक डॉक्टर ने धारावाहिक के लेखक मनोहर श्याम जोशी को सन्देश भिजवाया और कहा कि वे
बनारस, मसान और मैं

बनारस, मसान और मैं

बनारस, मसान और मैं एक दिन मसान देखी और किसी को समझा नहीं पाऊँगी इसे देखने का आफ्टर इफ़ेक्ट.जो मुझे करीब से जानते हैं, वो बनारस से मेरे spiritual attachment से वाकिफ हैं। कोई कहानी लिखती हूँ तो वह किसी
आपकी भागीदारी