ग्लोबल गुमटी

चिट्ठी न कोई संदेस, जाने वो कौन सा देस.. जहाँ तुम चले गये

जगजीत सिंह को याद करते हुए 

ये बात 1965 की है, जब मुंबई, बॉम्बे हुआ करता था। जगजीत सिंह नाम का एक 21 बरस का लड़का पठानकोट एक्सप्रेस से विक्टोरिया टर्मिनल स्टेशन पर उतरा और एलफिंस्टन रोड स्टेशन पर एक छोटे से कमरे किराये पर लिया।बॉम्बे जैसे शहर में जिंदगी आसान नहीं थी। बॉम्बे तेज़ रफ्तार से भागता है और जो उसकी ताल में ताल नहीं मिला पाते, बॉम्बे उन्हें रिजेक्ट कर देता है।

कुछ दिनों के बाद किराया नहीं देने के कारण जग जगजीत को एलफिंस्टन रोड के कमरे से बाहर निकाल दिया गया। यहाँ से निकलकर उसने शेर-ए-पंजाब हॉस्टल में 10 पैसों में एक सोने की जगह ली।यहाँ से जगजीत सिंह हर दिन लोकल पकड़कर चर्चगेट स्टेशन जाते जहाँ मायानगरी में किस्मत चमकाने हज़ारों युवा हर दिन जुटते थे।

यहाँ एक चाय की टपरी पर जगजीत सिंह की मुलाकात सुभाष घई से हुई।सुभाष हीरो बनने आया था और जगजीत प्लेबैक सिंगर।सुभाष घई बताते हैं

“हम दोनों दो अलग सपनों के साथ बॉम्बे आये थे। उस दौर में मुकेश का दबदबा था और किशोर कुमार भी स्ट्रगल कर रहे थे। मैं जगजीत को देखकर सोचता ये सरदार कैसे टिकेगा।” एक दिन मैंने जगजीत से पूछा “प्लेबैक क्यूँ” , उसने कहा ” हीरो क्यूँ” और हम दोनों हँस दिये।

बहुत बाद में एक एलबम Rare Gems जो जगजीत और चित्रा की यात्रा के भूले बिसरे गीत लेकर आया, उसमें जगजीत सिंह के कैरियर के शुरुआती दौर के दो गज़ल हैं- साकिया होश कहाँ था और अपना ग़म भूल गये।जहाँ अपना गम भूल गये में जगजीत ने मुकेश को कॉपी करने की कोशिश की, साकिया होश कहाँ में जगजीत सिंह ने अपनी शैली में गाया।जगजीत सिंह कहते हैं “मैं पूरे समय दुआ करता रहा कि लोगों को मेरी गायकी मेरी शैली में पसंद आये”।
और जगजीत की दुआ कबूल हुई।इसके आगे की कहानी और जगजीत और चित्रा सिंह की अमर जोड़ी गज़ल गायकी में माइलस्टोन है।

जगजीत सिंह की आवाज़ प्रेम के पीर की आवाज है, जगजीत सिंह की आवाज दर्द के टीस की आवाज़ है, 4 साल बाद भी जगजीत सिंह की आवाज जब सुनाई देती है तब एक सन्नाटा पसर जाता है, सन्नाटा जो कहता है कि यह खालीपन नहीं भरा जा सकता।

जगजीत सिंह के 10 ऐसे गज़ल हम ले कर आये हैं जो रूह को अंदर तक छू जाते हैं और दिल को एक अजीब सा सुकून देते हैं।
1)आँखों में जल रहा है क्यूँ बुझता नहीं धुआँ(मरासिम)

2) ना कह सकी बाहर आने के दिन हैं, जि़गर के दाग छिल जाने के दिन हैं (विज़न्स)

3) किसके कातिल मैं समझूँ ,किसको मसीहा समझूँ

    सब यहाँ दोस्त ही बैठे हैं,किसे क्या समझूँ

4)किसी का यूँ तो हुआ, कौन उमर भर फिर भी (कहकशाँ)

5)धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो, जिंदगी क्या है      किताबों को हटाकर देखो (सजदा)

6)दास्तान-ए-ग़म-ए-दिल उनको सुनाई ना गयी(मैजिक    मोमोंट्स)

7)बाज़ीचा-ए-अत्फाल है दुनिया मेरे आगे, होता है शबो रोज़ तमाशा मेरे आगे (मिर्जा़ गालिब)

8)आप आये ज़नाब बरसों में, हम ने पी है शराब बरसों में (जीवन क्या है)

9) ऐ खुदा रेत के सेहरा को समंदर कर दे, या छलकती आँखों को भी पत्थर कर दे (A sound affair)

10) हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे जाँ निकले (मिर्ज़ा गालिब)

4 साल पहले अाज के दिन ही जगजीत सिंह इस दुनिया को छोड़ कर चले गये।’हे राम’भजन सुनकर लता मंगेशकर ने कहा था कि अगर भगवान की कोई आवाज़ होती होगी, तो बिल्कुल जगजीत सिंह जैसी होगी।

अपनी मृत्यु के कुछ दिन पहले उन्होंने “तुम बिन” के मेकर्स से “कोई फरियाद” गज़ल जैसा कुछ दुबारा बनाने के लिये बोला था। आज टी सीरीज़ ने तुम बिन 2 का “तेरी फरियाद” गाना रिलीज किया है जिसमें रेखा भारद्वाज के साथ जगजीत सिंह की आवाज़ मिक्स की गई है। यह गाना सुनकर सिर्फ यही ध्यान आता है 

चिट्ठी न कोई संदेस, जाने वो कौन सा देस

   जहाँ तुम चले गये

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