ग्लोबल गुमटी

Dear Zindagi

जो दिल न लगे उसे कह दो बाय बाय #DearZindagi

बॉलीवुड एक ऐसे दौर से गुजर रहा है जहाँ हम फिल्मों मे कहानियाँ नहीं ज़िन्दगी को देख रहे हैं. हर उस हिस्से को छूती फिल्में जिनके बारे में हम बात भी नहीं करना चाहते थे, उन सभी फिल्मों में हम अपना अक्स देख रहे हैं. मुझे याद है जब मैंने Wake Up Sid देखी थी तो अपनी आइडेंटिटी ढूँढती कोंकना मुझे खुद जैसी लगी. गौरी शिंदे की Dear Zindagi मन की तहों में फिरते मन में ही जाकर रास्ता पा लेती है. इस बेहद खूबसूरत फिल्म में अलिया नर्वस ब्रेकडाउन के स्तर पर है, वह सफल है, उसके पास अच्छे दोस्त हैं, बाहर से देखें तो उसकी ज़िन्दगी अच्छी चल रही है पर अन्दर से देखे तो किआरा में दरार ही दरार हैं. मेंटल इलनेस को और थेरेपी से जुड़े पूर्वाग्रह को सिनेमा के बीच में लाकर खड़ा किया है Dear Zindagi में गौरी शिंदे ने.

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जब एक करैक्टर कहता है कि “फेलियर और भी होते हैं” तो हम अन्दर झांकते हैं और  हमें अपनी ज़िन्दगी की फेलियर का स्लाइड शो चलता दिखता है. इस फिल्म का हीरो इसका लेखन है. शाहरुख़ एक बहुत छोटे रोल में आये हैं पर एक शांत और सुलझे हुए साइकेट्रिस्ट के रूप में कुछ पावरफुल डायलाग के साथ हमें रोक लेते हैं फिल्म में, रोक लेते हैं कुछ सोचने के लिये, थाम लेते हैं हमारी ज़िन्दगी के खुले धागे. अगर शाहरुख़ को डायरेक्टर ने डायलाग दिए हैं तो अलिया भट्ट ने डायरेक्टर को उनकी फिल्म दे दी है. Dear Zindagi एकतरफा अलिया की फिल्म है. कॉफ़ी विथ करण के पहले एपिसोड में शाहरुख़ ने कहा था अलिया के लिये “ मुझे डर लगता है आलिया सबकुछ इतनी जल्दी कर रही हैं कि सब चुक न जाए” Dear ज़िन्दगी देखकर समझ आता है अलिया के लिये ऐसा क्यूँ कहा गया.

अलिया अपने सशक्र्त अभिनय और सिर्फ आँखों से इस फिल्म को अपने कंधे पर ले जाती हैं. उनकी उदास आँखें बहुत कुछ कहती हैं, वो बस टूटने की कगार पर है पर उस टूटन के पीछे एक मजबूत लड़की है जो तपाक से पूछती है “क्या मैं कॉमन हूँ?” आलिया एक बेहतरीन एक्टर हैं और उनकी चुप्पी के सीन्स हमारे साथ फिल्म खत्म होने के बाद भी रह जाते हैं. Dear Zindagi से अगर आप एक मसाला फिल्म देखने की उम्मीद में जा रहे हैं तो मत देखिये, Dear Zindagi आप किसी लव स्टोरी की उम्मीद में जा रहे हैं तो मत देखिये, Dear Zindagi में आप अपने सुपरस्टार शाहरुख़ को देखने जा रहे हैं, तो मत देखिये और अलिया भट्ट आपको क्यूट या हॉट लगती हैं तो भी Dear Zindagi मत देखिये.

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Dear Zinadgi देखिये अगर आप किसी आतंरिक संघर्ष से गुजर रहे हैं, अगर आप भी अपनी ख़ुशी ढूँढ रहे हैं, अगर आप भी “क्या कहेंगे लोग” के फेर में पड़े हैं और Dear Zindagi जरुर देखिये अगर आपका कोई अपना, कोई दोस्त, साथी, परिवार में कोई भी डिप्रेशन से गुजर रहा है. दवाओं को अपना काम करने दीजिये बस दोस्ती के, इंसान होने के पंख लगा दीजिये. हमें समझना होगा, हमें समझाना होगा, हमें साथ देना होगा हर उस शख्स से जो लड़ रहा है ये लड़ाई, इस लड़ाई में इंसान बीमारी से बाद में हारता है किसी के न परवाह करने से, अपनों की उदासीनता से पहले हार जाता है. आप जिनसे प्यार करते हैं, जो आपकी ज़िन्दगी का एक हिस्सा हैं, उनका हाथ पकड़िये, उन्हें बिना किसी जजमेंट के सुनिये, उनकी जगह खुद को रखिये, उनकी उदासी के पीछे छिपे एक खूबसूरत चेहरे से उन्हें फिर से मिलाइये क्यूंकि

“ अगर ठीक से रोयेंगे नहीं, तो ठीक से हसेंगे कैसे ?”

Dear Zindagi फिल्म का एक डायलाग है कि “हमारी लाइफ में बहुत सारे रिश्ते होते हैं- कॉफ़ी का रिश्ता, गॉसिप का रिश्ता, इंटेलेक्चुअल रिश्ता पर हम सारे रिश्तों का बोझ एक साथ अपने रोमांटिक रिश्ते पर डाल देते हैं”, ठीक वैसे ही हर फिल्म से हमारी एक्सपेक्टेशन का बोझ इस खूबसूरत फिल्म पर मत डालिये.

डिअर गौरी शिंदे, English Vinglish में अंग्रेजी के इलीट काम्प्लेक्स से लड़ती मुझे मिडिल क्लास की हर औरत दिखी थी तो Dear Zindagi में हमारे आस पास के कितने ही लोग जो कुर्सियों से दूर भाग रहे हैं, वो सिर्फ कुर्सी से ही नहीं ज़िन्दगी से भी दूर भाग रहे हैं, उन्हें बैठाने और उम्मीद दिलाने के लिये शुक्रिया.

डॉ. पूजा त्रिपाठी 

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4 Comments on “जो दिल न लगे उसे कह दो बाय बाय #DearZindagi

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