ग्लोबल गुमटी

hanuman

महाबली हनुमान और टाइम मशीन

महाबली हनुमान और टाइम मशीन

बड़ी जोर की लड़ाई चल रही थी, दोनों तरफ के योद्धा घमाघम लड़ रहे थे,  प्रभु राम के तीर अपने करतब दिखा रहे थे,  पर जानलेवा रावण के आगे सब करतब फेल…….। अभी घर भेदी विभीषण ने अपने भाई को कैसे किनारे लगाना है, का राज प्रभु राम के कानों में फूंका नहीं था।  हनुमान जी भारी टेंशन में थे कि क्या किया जाये…इस अमीबा की औलाद रावण को कैसे निपटाया जाय…. ठीक ऐसे ही वक्त भाई जेम्स बॉण्ड टाइम मशीन लेकर बीच बैटल से गुजर रहे थे हनुमान जी के हत्थे लग गए और रावण की भड़ास जेम्स बॉण्ड पर उतर गयी । एक मिनट में भाई साहब चित्त हो गए और इसी बीच विभीषण ने कान फूंक ही दिया और प्रभु राम के तीर बरस पड़े रावण पर और और और…..। ख़ैर…
बात यहीं खत्म हो जाती तो क्या बड़ी बात थी जब विजय दिवस मना लिया गया , अपि स्वर्ण मयी लंका वाली बात हो-हुआ चुकी और राम ने सबको विदाई दे दी,  पुष्पक भी लौट गया,  फिर बचा ये जेम्स बॉंड और उसकी वो टाइम मशीन। राजवैद्य ने बॉण्ड की औलाद को तो चंगा कर दिया पर याददाश्त भाईसाहब गवा बैठे , चाहते तो राम उसकी याद्दाश्त सेकेंडो में ला सकते थे, पर इंसानी अवतार में थे इसलिये ये काम बल बुद्धि विद्या देने वाले हनुमान को सौपी गया। हनुमान जी ने बड़े पसीने बहाये फिर मशीन ठीक हुई और फिर क्या था टाइम सेट किये और बॉंड भाई साहब को मशीन में धरे और रवाना हो लिए पर मशीन में बड़ी बारीकी होती है थोड़ा सा चूके नहीं कि कहीं का कहीं पहुँच गए…और उस पर एक हाथ से ही मशीन को सेट करना बड़ी बात थी क्योंकि दूसरे हाथ से गदा वे छोड़ने को राजी ही नहीं थे…।

हाँ तो भैया फिर क्या था पहुँच गए फ़्रांस की क्रांति के बीच…. बड़ी अराजकता छायी हुई थी पर सबकुछ सम्भाल लिया और जा बैठे क्रांतिकारियों के झंडे पर अब तो जीत उनकी पक्की ही थी जीता तो दिया उन्होंने पर झंडा जिस पर बैठे थे बड़ा कमजोर था लपलपा रहा था बड़ी मुश्किल से खुद को गिरने से बचाये…..और दुनिया को समानता, स्वाधीनता बन्धुत्व से रहने की सीख देकर दोबारा मशीन सेट करके उड़ चले।

फिर एक हाथ से मशीन गलत सेट हो गयी । जा पहुँचे अमेरिकन सिविल वार में दासों की बड़ी बुरी स्थिति, हनुमान भी राम के सेवक ही तो थे पर कितना सम्मानित जीवन जिया उन्होंने। उनकी हालत देखकर करुणाद्र हनुमान की आँखे भर आई फिर क्या था वैम्पायरो के पैंट ढीले हो गए , दासों का खून पीने वाले वैम्पायर(पूँजीपति, सामन्त) भाग खडे हुए….और अमेरिका में वास्तविक लोकतन्त्र स्थापित हुआ…..
मशीन गलत सेट होती रही और हनुमान जी कभी फर्स्ट वर्ल्ड वॉर पहुँचे कभी सेकण्ड वर्ल्ड वॉर से गुजरते रहे….। हिटलर क्या आत्महत्या किया था भला ….?,वह तो रावण का ही अवतार था यहाँ मना करने के लिए राम भी न थे जो हनुमान पर पाबन्दी लगाते । तो फिर क्या था हिटलर भाईसाहब को पहले हल्क की तरह धोया और फिर…..फिर क्या ? वर्ल्ड वॉर ख़तम । सयुंक्त राष्ट्र की स्थापना हुई , मात्र 1 मिनट के लिए अध्यक्ष भी रहे चूंकि राम काज कीन्ह बिनु उन्हें कहा विश्राम था । फिर वे निकल पड़े…..

मशीन मान में अब कुछ कुछ आ गयी थी । लग रहा था दो तीन बार में पहुँच ही जायेंगे, पहुँचने से पहले वे वियतनाम गए। उसी अमेरिका को नानी याद दिलायी जिसे कभी उन्होंने बचाया था। क्यूंकि अब वहाँ अब्राहम लिंकन नही थे कोई वैम्पायर वहाँ आ बैठे अमरीका को इससे बड़ी असफलता और कहीं नहीं मिली। अगली बार वे जा पहुंचे क्यूबा संकट जब रशिया और अमेरिका ने मिसाइल एक दूसरे पर तान रखी थी दोनों के गाल आज तक लाल हैं। दुनिया दो थप्पड़ों में ही तबाह होने से बच गयी ।
अंत में हनुमान जी तंग आकर अपना गदा नीचे रख ही दिए और पहुँच ही गए सही जगह हॉलीवुड!

एक बार तो लगा की राक्षस फिर पैदा हो गए क्या…..?,लेकिन लोगों ने समझाया भाई हम तो बस एक्टर हैं नकली कपड़े पहन रखे हैं और बस एक्टिंग कर रहे हैं। बॉण्ड को सही हाथों में सुपुर्द किया और टाईम मशीन अपने साथ ले लिए ताकि उसका दुरूपयोग न हो….और फिर अंत में सोचा मेरे राम का अयोध्या कैसा दिखता होगा । देख लिया जाय और श्रीलंका का भी हालचाल ले लिया जाय…. ।

पहुँचे पहले श्रीलंका देखने, देखकर बड़े खुश हुए अधिकतर लोग बौद्ध हैं सारे राक्षस कहाँ गए भला…..? किसी ने बताया , अफगानिस्तान-पाकिस्तान बोर्डर पर हैं और कुछ इराक सीरिया सोमालिया में । चूँकि बहुत देर हो चुकी थी प्रभु राम को फ़िक्र हो रही होगी यह सोचकर हनुमान शीघ्रातिशीघ्र लौट जाना चाहते थे पर अयोध्या के दर्शन के बिना, यह तो सम्भव नहीं था पहुंच गए अयोध्या….राम जन्मभूमि , जिला फैजाबाद, स्टेट-उत्तरप्रदेश, देश-इण्डिया….. ।

सबकुछ बदल गया था पूरी सड़क खाली थी और एक जगह बस भीड़ जमा थी एक दौड़ते हुए आदमी को रोका, झट से उसने हाँफते हुए कहा छुटट्टे पैसे नहीं है कभी और…। हनुमान ने कहा अरे भाई बस मैं ये पूछ रहा था कि सड़कों पर इतना सन्नाटा क्यूँ हैं….? घूर के देखते हुए उसने कहा अरे नौटंकी !…….इत्ता भी नहीं जानते यहाँ सड़के तब खाली होती हैं जब दँगा होता है कर्फ्यू लगता है या क्रिकेट मैच होता है और सचिन खेलता है या रामानंद का रामायण आता है घबराओ नही आज रामायण आ रहा है । और सीता हरण है…. अरे ! सीताहरण फिर….? टीवी में देखें ……अरे सच में सीता रो रहीं थी रावण हंस रहा था और किसी का रेडियो पीछे से बज रहा था और उसमें से आवाज आ रही थी आज बाबरी विध्वंस मामले की सुनवाई है……भोपाल गैस त्रासदी की बरसी है और कई दलित कन्याओं के साथ सामूहिक बलात्कार के मामले में मुजरिमों को सबूतों के अभाव में छोड़ दिया गया है……..

रामभक्त हनुमान का दिल बैठ गया ,आँखे डबडबा आई ….गला उनका रुंध गया ,सारी शक्ति जैसी क्षीण हो गयी हो, मेरे राम की यह अयोध्या …..जिसके लिये उन्होंने सोने की लंका छोड़ दी थी, स्वर्ग को कमतर बोला था,उसी अयोध्या में दलित लड़कियों के साथ सामूहिक बलात्कार , सबूतों के आभाव में अपराधी बाइज्जत बरी…..हे धरती माँ ! एक बार फिर फटो…..

13419001_1128539820551003_2767719045553001134_nदीपक जायसवाल

लेखक मूलतः कुशीनगर, उत्तरप्रदेश से हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य की पढाई की है। लिखने-पढ़ने का शौक रखते हैं। इनके लेख और रिपोर्ट्स कई पत्र पत्रिकाओं में छपते रहते हैं। संप्रति उत्तरप्रदेश सरकार की सेवा में कार्यरत हैं

फेसबुक प्रोफाइल के लिए क्लिक करेंhttps://www.facebook.com/deepakjaiswal91

 

6 Comments on “महाबली हनुमान और टाइम मशीन

Leave a reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

आपकी भागीदारी