ग्लोबल गुमटी

inn ankho ki masti

इन आँखों की मस्ती के…

इन आँखों की मस्ती के… मस्ताने हजारो थे.. है.. और रहेंगे..

 

 

14 वर्षीय साँवली और भरे गालों वाली एक लड़की भानुरेखा, लाइट्स की चकाचौंध के बीच खड़ी है, दृश्य है 5 मिनट्स लंबे चुम्बन को फिल्माने का. एक नाबालिग से ऐसा दृश्य विवादास्पद घटना थी। हिंदी ना समझने वाली एक लड़की जिसे स्कूल में होना था वह मायानगरी में अपने पैर जमा रही थी. वह छोटी लड़की भानुरेखा आज रोल मॉडल के रूप में खूबसूरती की मिसाल और एक दिलकश अभिनेत्री रेखा के रूप में अपनी काबिलियत साबित कर चुकी है आज 10 अक्टूबर को उनके जन्मदिवस पर उसी सांवली लड़की के सफर को हम सलाम करते हैं जिसने मुश्किलों में भी कभी अपनी मुस्कान फीकी नहीं पड़ने दी।

तेलुगु फिल्मों में बतौर बाल कलाकार काम करने वाली रेखा के लिए बतौर लीड हीरोइन फ़िल्मी सफर की शुरुआत हुई फिल्म ‘सावन भादो’ से। ‘सावन भादो’ के साथ घर, खूबसूरत, सिलसिला,खून भरी मांग, जुबैदा, इजाज़त और उमराव जान जैसी शानदार और यादगार फिल्मों में अपने अभिनय का जादू बिखेरने वाली रेखा ने अपनी शुरुआत को याद करते हुए कहां ” बॉम्बे एक जंगल की तरह था, जहां मैं निहत्थी चल रही थी। यह मेरे जीवन का सबसे भयावह दौर था। मैं इस नयी दुनिया के तौर तरीकों से बिलकुल अनजान थी. लोगों ने मेरी कोमलता और भावुकता का अनुचित लाभ उठाया। मैं सोचती थी ‘मैं क्या कर रही हूँ? मुझे स्कूल में होना चाहिए था, आइस-क्रीम खानी थी, दोस्तों के साथ मज़े करने थे अपनी उम्र के बाकी बच्चों की साथ सामान्य जीवन के बदले मैं यूं काम करने के लिए मजबूर क्यों हूँ? ‘ हर रोज़ मैं रोती थी क्योंकि मुझे वो सब खाना पड़ता था जो मैं पसंद नहीं करती थी, ऊट-पटांग सितारों वाले कपडे पहनने पड़ते थे जो बुरी तरह चुभते थे। पोशाक, गहनों से मुझे एलर्जी होती थी। बालों में लगाया जाने वाला स्प्रे कितनी ही बार बाल धो लेने पर भी नहीं निकलता था। मुझे एक स्टूडियो से दुसरे में धकेला जाता था। एक 13 वर्षीय बच्चे के लिए यह दर्दनाक था। ‘

इससे मुझे याद आती है वह चिट्ठी जो अभिनेत्री बबिता ने अपनी एक प्रशंसिका को लिखी थी -‘जब तुम मीठी नींद लेती हो, मैं अपने चेहरे पर जमा मेकअप निकाल रही होती हूँ.’ मायानगरी की चकाचौंध में चमक रहे सितारे इस चमक तक पहुँचने के लिए बहुत से दर्द छिपा जाते हैं जो परदे पर नज़र आते हुए भी परदे में छिपे रह जाते हैं। सिमी ग्रेवाल को दिए इंटरव्यू में सिमी के यह पूछने पर कि क्या पिता के बिना बचपन बिताने का उन्हें अफ़सोस है पर रेखा बड़ी साफगोई से जवाब देती हैं कि जीवन में पिता का कभी कोई अस्तित्व रहा ही नहीं तो फिर कमी कैसी ! साथ ही वे यह भी कहती हैं कि उनके मन में किसी के लिए कोई कड़वाहट नहीं है और ना कभी रही है।

बचपन की भानुरेखा को याद करते हुए रेखा कहती हैं कि भानुरेखा अभिनेत्री नहीं बनना चाहती थी बल्कि घर बसाना चाहती थी। एक प्यार करने वाला जीवन साथी और बच्चे चाहती थी। भानुरेखा से रेखा तक के सफ़र में हमसफ़र को लेकर हमेशा विवादों में रही रेखा की कहानी। विनोद मेहरा, मुकेश अग्रवाल के साथ असफल शादियों के बाद अमिताभ बच्चन के साथ रेखा के सम्बन्ध चर्चा में रहें। रेखा की खूबसूरत आँखें शिकायत नहीं करती। झुकती है और फिर उतनी ही खूबसूरती से उठती हैं। तमाम विवादों के बीच भी रेखा ने कभी अनर्गल बयानबाज़ी नहीं की. अमिताभ और रेखा के संबंधों पर रेखा का रुख उमराव जान के गीत की तरह कुछ यूँ रहा – ‘तुझको रुसवा ना किया खुद भी पशेमान ना हुए’.

बॉलीवुड के फ़लक पर बहुत से सितारे छाये लेकिन नए कलाकारों के आने पर जगह खाली करते चले लेकिन रेखा के साथ ऐसा नहीं हुआ उम्र का बढ़ना एक खूबसूरत प्रक्रिया रही, उम्र बढ़ने के साथ उनकी चमक बढ़ती रही। उनकी जादूगरी के हम सब आज भी क़ायल हैं। सदाबहार रेखा का आँखों से मय पिलाने का हुनर आज तलक फीका नहीं हुआ। ग्लैमर की चकाचौंध इस 70 के दशक की अभिनेत्री को पीछे नहीं धकेल सकी बल्कि नए दौर की अभिनेत्रियों को भी टक्कर देने का माद्दा है रेखा में।

उमराव जान के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित रेखा का आज तक हर कोई दीवाना है। हाल ही में लॉन्च हुई इनकी बायोग्राफ़ी ‘रेखा : द अनटोल्ड स्टोरी’ रेखा के फैंस के लिए उनके जन्मदिन का रिटर्न गिफ्ट ही है।

 

अदिति शर्मा

5 Comments on “इन आँखों की मस्ती के…

  • Nothing substantial in above post about Rekha which only mentioned about her few good movies and her personal affairs and broken marriage..Author in above post also mentioned about magic of Rekha..But she failed whole country, Congress party and above all her ever growing fans when she was nominated as a member of Rajya sabha..she only attended 7 days in her total tenure. Rekha as a actress, judged her nomination as another TROPHY of film industry..But,yes as a actress she may be still admire.Thanks

  • Hi Ashish. Thank you for your valuable comment. Motive of above post was just to wish an actress who gave so much to the industry. It was not her critical analysis. Admiration and respect to her journey, that’s all. When a person writes something he/she writes his/her perspective as per their vision. But I am sure Rekha’s biography will be a better option to know about her more significantly.

    Regards!

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