ग्लोबल गुमटी

क्यूंकि राजनीति में अपमान के प्रतिशोध से जन्म लेती है जयललिता…

हमारी पीढी ने भारत के राजनीतिक नक़्शे के तीन छोरों- उत्तर, दक्षिण और पूरब में क्रमशः मायावती, जयललिता और ममता बनर्जी को लोकतंत्र के सिंहासन पर काबिज देखा है. सनक की हद तक सर्वाधिकारवादी होने के साथ साथ एक और चीज जो इन तीनों में कॉमन रही है वो है कि तीनों ने अपने अपमान का बदला को अपना व्यक्तिगत और राजनीतिक मिशन बनाया और इसी प्रतिशोध की आग से इनका राजनैतिक कैरियर भी चमक उठा. 

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कहा जाता है कि गेस्ट हाउस काण्ड में सपा के कार्यकर्ताओं (पढ़ें – गुंडों) से मायावती की जान बड़ी मुश्किल से बच पायी थी. पर इसके बाद सत्ता पर आने के बाद मायावती ने सपा और उसके चहेतों पर कहर बरपा कर त्राहि त्राहि करवा दिया. इससे उनकी छवि, लोकप्रियता और वोटों में मजबूती आती गयी और वो उत्तर प्रदेश और भारत की राजनीति में एक एसा ध्रुव बनकर उभरीं जिसे कोई राजनीतिक पार्टी या विश्लेषक शायद ही अनदेखा करने का जोखिम लेगा. इसी तरह बंगाल में लगभग तीन दशकों से सत्ता के सिंहासन पर पैर चढ़ा कर बैठे भद्रलोकी धोतीधारी कम्युनिस्ट सरकार के खिलाफ जैसे शिखा खोल और चप्पल पहन कर अखाड़े में उतरीं ममता बनर्जी को भी कई मौकों पर सरकारी मशीनरी के लाठी-डंडों का सामना करना पड़ा जो कि अपने बुझते दौर में कम्युनिस्ट शासन का विरोधियों के प्रति आम चरित्र हो गया था. हालांकि सत्ता पर आने के बाद विरोधियों के प्रति रूख के मामले में ममता अपने पूर्ववर्तियों से असहिष्णुता में बीस ही साबित हुईं, उन्नीस तो बिलकुल नहीं पर उत्तरप्रदेश की तरह बंगाल में भी इस रुख ने ममता को और मजबूत ही किया और कम्युनिस्ट विरोधियों ने उनके क़दमों को खूब सराहा और जस्टिफाई किया, भले ही पत्रकारों, कलाकारों और लेखकों का रेला सिगरेट-बीड़ी का धुंआ उड़ाता विरोध में सड़क पर मार्च करता रहा.

कुछ ऐसा ही किस्सा जयललिता का भी रहा है. एम जी रामचंद्रन के निधन के बाद तमिलनाडु में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी अन्नाद्रमुक (AIADMK) पूरी तरह जयललिता की मुट्ठी में आ गयी थी. करूणानिधि के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ द्रमुक (DMK) पर सरकारी मशीनरी का दुरूपयोग जयललिता के खिलाफ करने के आरोप लग रहे थे. 25 मार्च 1989 को जयललिता का फोन टैपिंग करवाने के आरोप को लेकर सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच हाथापाई जैसा माहौल बन गया था, फलतः विधानसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी गयी. इसके बाद जयललिता सदन से बाहर निकलने लगीं तो DMK सदस्यों ने उनका रास्ता रोक लिया और उनकी साड़ी पकड़ ली. इस धक्कामुक्की से जयललिता का पल्लू खुल गया और वो फर्श पर गिर पड़ीं. इसके बाद जयललिता उसी अस्त व्यस्त हालत और बिखरे बालों में गुस्से और अपमान से तमतमाई हुई बाहर निकलीं और मीडिया के सामने आकर पूरी कहानी बयां की. मीडिया के कई विश्लेषकों ने उनके उस रूप की तुलना महाभारत की कथा में कौरव सभा  में अपमानित और क्रुद्ध द्रौपदी से की इस प्रकरण का नाम पांचाली प्रकरण प्रचलित हुआ.

जयललिता

      इमेज स्रोत – thenewsminute.com

पर इस द्रौपदी ने भी सत्ता में आने के बाद खूब महाभारत मचाया. 2001 में करुणानिधी को उनके कुनबे के कई सदस्यों और पूर्व केन्द्रीय मंत्री मुरासोली मारन को आधी रात में जिस तरह घसीटते और धकियाते हुए तमिलनाडु पुलिस ने गिरफ्तार किया वैसी जलालत किसी पूर्व मुख्यमंत्री को शायद ही झेलनी पड़ी हो और जिसे देखकर कोई व्यक्ति कभी राजनीति में आने का इरादा ही हमेशा के लिए छोड़ दे.

25 मार्च 1989 की यह द्रौपदी MGR और रजनीकांत के बाद तमिलनाडु की सबसे बड़ी फेनोमेनन रही है. अब जब उनकी मृत्यु हो चुकी है तो आने वाले कुछ दिनों में तमिलनाडु से आने वाली ख़बरें इस बात की तस्दीक भी कर ही देंगी.

निशीथ सिंह  

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