ग्लोबल गुमटी

प्यार, इश्क और लव कॉफ़ी….नॉट माय कप ऑफ़ टी…

इश्क़, प्यार, लव, प्रेम, मोहब्बत-ना जाने क्या-क्या नाम हैं इस कमबख़्त के। इसके फुल मेरी लाइफ़ के गार्डन में उगते ही नहीं हैं। 15 साल का था जब गाना आया था-“ऐसा पहली बार हुआ है 17-18 सालों में।” मैंने भी सोचा 2-3 साल में मेरे साथ भी कुछ पहली बार होगा लेकिन घंटा! कुछ नहीं हुआ।और अब तो ऐसा लगता है मानों 17-18 साल का हुए सदियाँ निकल गयी हों।
मैंने सोचा शायद इश्क़ स्मार्ट लड़कों को ही होता होगा और फिर मैं ऐसा काला-कलूटा कि तगड़ी गर्मी में भी सनस्क्रीन नहीं लगाता क्योंकि और काले होने का स्कोप ही नहीं है। लेकिन बाद में पता चला कि प्रेम की कोई शक्ल, उम्र, काया, भाषा, राजनीति, सरहद इत्यादि कुछ नहीं होता-माने सीधी भाषा में- प्रेम सबसे बड़ा आवारा होता है।

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ये सोचकर ढाँढस बँधा और हम फिर जुट गए दुष्ट प्रेम की तलाश में। माहौल बनाने के लिए प्रेम पर लिखे पन्ने पढ़ना शुरू किया। लेकिन वो पढ़कर फिर मेरे अस्तित्व को चोट पहुँची। एक जगह लिखा-

“ये इश्क़ नहीं आसां, बस इतना समझ लीजे,
इक आग का दरिया है और तैर के जाना है।”

अब बताओ तैरना ही नहीं आता यार। और फिर चैलेंज ऐक्सेप्ट करने से तो मेरा अस्तित्व समाप्त हो जाता है। एक बार किसी ने पूरे ग़ुस्से में और मुझे नीचा दिखाने की दृष्टि से कहा-“भाई, तू एक बार में 2 km नहीं भाग सकता।” मैंने कहा-“आपकी बात बिलकुल सही है, मैं तो आधा किलोमीटर भी नहीं भाग सकता।” लेकिन मेरे मित्र ने ऐक्सेप्ट कर लिया। थोड़ी देर बाद- मैं पेड़ के नीचे बैठ कर मूँगफली छील रहा था और मेरा दोस्त गरमी में पसीना निचोड़ रहा था। मतलब, “आप इतने नीचे गिर जाओ कि आदमी आपको और नीचे गिरा ही ना सके।” तब की ख़ुशी से सबक़ मिला, चैलेंज ना ऐक्सेप्ट करो। “दो मिनिट की बेज़्ज़ती, ज़िंदगी भर का सुकून।” तो जब “इश्क़ नहीं आसां” कहा, तो हम वैसे ही एक क़दम पीछे हो लिए।
ऐसे ही एक बात और पढ़ी-

“लगी बिना रैन ना जागे कोई।”

माने जब तक मोहब्बत की लत ना लगे, वो रात नहीं जागता। ये फिर मेरे अभिमान को चोट हुई। नींद के साथ कोई खिलवाड़ नहीं चलती। एक तरफ़ नींद और दूसरी तरफ़ प्रधानमंत्री, हम बिना सोचे नींद के पलड़े में बैठेंगे। तो फिर इश्क़ क्या चीज़ है? प्यार के वास्ते रात जागना तो घाटे का सौदा है। “विरह में रुदन भी मचाओ, निद्रा को भी दूर भगाओ।” ये ना चल पाएगा।

तब समझ आया कि मोहब्बत की ‘लत’ लगने से अच्छा मोहब्बत की ‘लात’ खा लो, और इन सब चोचलेबाज़ी से दूर रहो।

तब से आज तक, यदि कोई दुनिया के सामने लड़की को घुटने पर बैठकर प्रपोज़ करता है तो भले ही जनता ‘awww’ करती हो, मुझे लड़के के धड़ पर गधे का सिर नज़र आता है। कोई मूवी या पुस्तक में प्यार का सीन आ जाए तो भले ही जनता रुदन मचा दे, मुझे हँसना आ जाता है। कोई गिफ़्ट-गिफ़्ट खेले तो मुझे समझ आ जाता है कि अब वो उसकी दी हुई टाई/शर्ट पहन कर ओवर एक्टिंग करेगा और वो उसका दिया हुए पर्स झेल कर।

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ऐसे ही एक बार में एक कैफ़े में गया। कॉफ़ी मेरे पास आयी, उस पर झाग से दिल बना रखा था (जो दिलदारों जितना ही टेम्परेरी था) और साथ में बिल आया 300 रुपए का। मैंने पूछा-“भाई, इतने रुपए कैसे?” बोला-“सर, स्पेशल लव कॉफ़ी है।और सर, सबसे ज़्यादा बिकती है।” तब मुझे समझ आया कि प्यार तो दिमाग़ से नहीं होता, लेकिन उसके बाद का कोई भी काम भी दिमाग़ से नहीं होता।
मैं इतना दूर भाग आया हूँ कि अब मेरी लाइफ़ में पार्टनरशिप के नाम पर सिर्फ़ ‘पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप’ बची है। ‘committed’ होने के नाम पर suicide ‘commit’ करना ही बचा है। 3 मैजिकल वर्ड्स हमारे लिए हैं- या तो ‘i dont know’ या फिर ‘रिज़ल्ट आ गया।’ कैंडल लाइट्स, गिफ़्ट्स, डिज़ाइन वाले कप, सड़ी सी सेल्फ़ियाँ-ये हमारे लिए अछूत हो चुकी हैं।मोबाइल में पासवर्ड लगाने का औचित्य नहीं बचता। कुछ दिन ना नहाओ, Deo ना लगाओ, बाल ढंग से ना बनाओ, कैसे भी कपड़े पहन लो- ये सब चलता है। यही तो स्वतंत्रता है। प्रेमियों का तो संवैधानिक ‘स्वतंत्रता का अधिकार’ ही समाप्त सा हो जाता है। ऐसा लगता है कि क़ैदी, शत्रु मुल्क के नागरिक की जो हमारे यहाँ हालत है वही प्रेमियों की है।
मेरी तो ये हालत हो गयी है कि conjuring, आहट या कोई भी हॉरर से सामना करवा दो, बच जाऊँगा लेकिन मोहब्बत से डर लगने लगा है साहब!
दशा ये है कि ग़लती से कोई प्रपोज़ भी कर देता है तो मुझे बोलना पड़ता है-“तुम्हारी पसंद अच्छी नहीं है।” कोई अजनबी लड़की यदि ‘hi’ बोल दे तो ऐसा लगता है किसी कि हाय लग गयी है। लोग शाहरुख़, काजोल आदि को प्रेम के मामले में फ़ॉलो करते होंगे, हम मायावती, जयललिता आदि के फ़ैन होते जा रहे हैं।
ऐसे प्रेम के पाश में पड़ी दुनिया में बस ये शेर ही सहारा रहा है-

“वसियत मीर ने मुझको यही की,
कि सबकुछ होना तो, आशिक़ ना होना।”

अगम जैनअगम जैन 

लेखकप्रशिक्षु आईपीएस है. समाज और व्यवस्था पर इनकी बहुत पैनी पकड़ और दृष्टि है जिसका एक उदाहरण उन्होंने प्रेम पर अपने इस व्यंग्य लेख में दिया है.

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5 Comments on “प्यार, इश्क और लव कॉफ़ी….नॉट माय कप ऑफ़ टी…

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