ग्लोबल गुमटी

कन्नड़ फिल्म अभिनेताओं की मौत ने उठाए गंभीर सवाल

कन्नड़ फिल्म ‘मस्तीगुडी’  की शूटिंग के दौरान तीन कन्नड़ अभिनेताओं को छलांग लगाने को कहा गया और उनमें दो को तो बिना लाइफ जैकेट के ! मुख्य अभिनेता विजय के पास लाइफ जैकेट थी और वह तो बच गए पर दो होनहार अभिनेताओं उदय और अनिल  को कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री ने हमेशा के लिए खो दिया। बेंगलुरु से 35 किलोमीटर दूर थिप्पागोंडनहल्ली की घटना है; थिप्पागोंडनहल्ली डैम में हैलीकॉप्टर से कूदने के बाद ये दोनों अभिनेता वापस नहीं आ सके। मरने के पहले कन्नड़ अभिनेता उदय ने यह कहा भी था कि ‘मैंने अपनी जिंदगी में इस तरह का स्टंट नहीं किया है और मैं डरा हुआ हूँ।’

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मुख्य अभिनेता तो फिल्मों की तरह लाइफ जैकेट होने के वजह से बच गए पर विलेन का किरदार निभाने वाले दोनों एक्टरों को फिल्मों की तरह ही जान गवाँनी पड़ी। 

फ़िल्म इंडस्ट्री में ऐसी घटना कोई पहली बार नहीं है। इस तरह की घटनाएं हमेशा एक सवाल छोड़ जाती है कि इस तरह के एक्सीडेंट्स आखिर कब तक होते रहेंगे ?

बात दिसंबर 2010 की है जब बनारस में फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर‘  की शूटिंग हो रही थी और कुहासे के कारण अनुराग कश्यप के असिस्टेंट डायरेक्टर सोहेल की अहले सुबह जीप एक्सीडेंट से मौत हो गई। सोहेल की मौत ने  कई सवाल छोड़ दिए कि आखिर घटनास्थल पर  पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं थे ?

फिल्म इंडस्ट्री में इस तरह की घटनाएँ सोचने पर मजबूर कर देती हैं . बात 1980 की है जब चेन्नई के निकट शोलावरम में मलयालम फिल्म ‘कोलियक्कम‘ की शूटिंग के दौरान अभिनेता जयन चलती हुई मोटर बाइक से हेलीकॉप्टर पर कूदने का दृश्य खुद कर रहे थे और जयंत पहले टेक से संतुष्ट नहीं थे और दूसरे टेक में आखिरकार वो भयानक हादसा हुआ जिसके कारण हैलिकॉप्टर का पायलट अपना संतुलन खो बैठा था और फिल्म इंडस्ट्री से जयन ने हमेशा के लिए अलविदा कह दिया !

फिल्म ‘कुली’ की शूटिंग को कौन भूल सकता है ? 1982 की घटना है

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जब एक फाइट सीन के दौरान पुनीत इस्सर की उंगलियों की जोर से अमिताभ की अंतड़ियां फट चुकी थी और बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन जीवन और मौत के बीच संघर्ष करने लगे। पुनीत इस्सर पर आरोप लगे कि वह शत्रुघ्न सिन्हा के कैम्प के आदमी हैं तो कुछ ने कहा की पुनीत इस्सर को इस काम के लिए राजेश खन्ना ने पैसे दिए थे। बिग बी ने इन अफवाहों को खारिज किया, इस्सर की पत्नी ने अमित जी को खून भी दिया था । अंततः अपने स्टार के लिए पूरे देश की दुआएँ और प्रार्थनाएँ काम आईं और बिग बी नाजुक हालात से बाहर आ गए।

इसी तरहशूटआउट एट वडाला’ की शूटिंग के दौरान जॉन अब्राहम , ‘खाकी’ की शूटिंग के दौरान ऐश्वर्या राय , ‘गुंडे’ की शूटिंग में रणवीर सिंह, ‘अग्निपथ’ की शूटिंग के दौरान रितिक रोशन, ‘राउडी राठौड़’ के दौरान अक्षय कुमार, ‘बोल बच्चन’ के एक दृश्य के दौरान अभिषेक बच्चन, ‘दूल्हा मिल गया’ की शूटिंग के दौरान शाहरुख और ‘वांटेड’ की शूटिंग के दौरान सलमान खान भी अब तक गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं।

इस तरह की घटनाएं हमें सोचने पर मजबूर करती हैं कि फिल्म इंडस्ट्री आखिर अपनी सुरक्षा के लिए इतनी लापरवाह क्यों हैं ? 1980 में  हेलीकॉप्टर से संबंधित शूटिंग के दौरान अभिनेता जयन को खोने के 36 साल बाद भी हमने उदय और अनिल जैसे अभिनेताओं को खोया है. आखिरकार फिल्म इंडस्ट्री अपनी सुरक्षा इंतजामों के लिए कब गंभीर होगी ? उदय और अनिल को तो  हम वापस नहीं ला सकते हैं पर आगे इस तरह के हादसे ना हो इसके लिए पुख्ता इंतजाम करने होंगे।

अभिनव मिश्रा

14713787_1186749611400303_3930436399892075501_nराजनीतिक सामजिक मुद्दों पर इनके लेख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं. मूलतः बिहार के गोपालगंज से आते हैं. बीएचयू से पढाई की है और अभी जेएनयू में शोधार्थी हैं.

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3 Comments on “कन्नड़ फिल्म अभिनेताओं की मौत ने उठाए गंभीर सवाल

  • यह सचमुच अजीब सी बात है कि दुर्घटनाओं को मसाला बना कर परोसने वाला फिल्म जगत कभी-कभी खुद भी इसका शिकार हो जाता है| चाहे वो जहाज डूबने की व्यथा को लव स्टोरी में पिरोने वाले टाइटैनिक के निर्देशक जेम्स कैमरून हो या द बर्निंग ट्रेन वाले अपने रवि चोपड़ा, सभी ने इस मसाले को खूब भुनाया | पर हमारा सवाल ये नहीं है, फिल्म ‘मस्तीगुडी’ के अभिनेताओं की दुर्घटना में मौत अपने आप में कई सवाल खड़े करती है| हमें वो गाना तो याद ही होगा “अम्मा देख तेरा मुंडा बिगड़ा जाये” पेशेवर स्टंटमैन के जीवन पर आधारित जैकी श्रोफ़ की फिल्म “स्टन्टमैन” हमें उनके द्वारा उठाय गए खतरों और व्यक्तिगत जीवन में आने वाली परेशानियों से अवगत करती है| रोज अपने जीवन को भगवान भरोसे छोड़ उन्हें अपना काम करना पड़ता है ताकि अभिनेता सुरक्षित रहे| अक्षय कुमार ने जबसे खतरनाक दृश्यों को बिना डुप्लीकेट के माध्यम से फिल्माने का एक नया ट्रेंड शुरू किया है, तबसे हर अभिनेता में भी वही जोश है | फिल्मो में वास्तविकता लाने के लिए यह जरूरी नहीं है कि निर्देशक उनको बिना सुरक्षा व्यवस्था का आकलन किये उनसे ऐसे दृश्य शूट कराय| अभिनेता कभी भी पेशेवर स्टन्टमैन का विकल्प नहीं हो सकता, दुर्घटनाओ को सिर्फ अच्छे इंतजाम और निर्देशक के विवेक से ही टाला जा सकता है |

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