ग्लोबल गुमटी

गंगा जमुनी लहरों पर जब छठ मनाते हैं मुसलमान तब दिल कहता है, वाह मेरी जान हिंदुस्तान

कभी एक शायर नीलोत्पल मृणाल  ने कहा था-

न गीता पढ़ता है न कुरान देखता है,

हर शै में वो पागल हिंदुस्तान देखता है

 

यकीनन ये शेर लिखते समय उनके दिल में हिन्दुस्तान की गंगा जमुनी तहजीब का ताना बाना जरूर रहा होगा. गंगा में मिलती जमुना की रवानी ज़रूर रही होगी, और ज़रूर रही होगी मंदिर की घंटियों के साथ सुनाई देने वाली अज़ान की पाकीजगी, और वो इसलिए क्योकि इस देश की माटी की महक ने अपनी सोंधी खुशबु में हर धर्म, हर जाति और हर संप्रदाय को महकाया है. और इसी मामले में ये देश दुनिया में अपनी सांस्कृतिक छटा के लिए मशहूर रहा है……..छठ के त्यौहार में कुछ ऐसी ही कहानियां हम लेकर आये हैं ख़ास आपके लिए, जिसे जान सुन आप कहेंगे…वाह मेरी जान…हिन्दुस्तान

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बिहार के गोपालगंज ज़िले के निवासी हसमुद्दीन अंसारी की चार बेटियां हैं. उन्होंने छठी मैया से एक बेटे की मन्नत मांगी थी. मन्नत मांगने के अगले साल ही उन्हें बेटा हुआ. बेटा होने की खुशी में उनकी पत्नी बीते 3 साल से छठ करती आ रही हैं. हसमुद्दीन के गांव का नाम चनावे गांव है. छठ मनाने वाला ये परिवार कोई अकेला मुस्लिम परिवार नहीं है. इस गांव में 150 हिन्दू और करीब 20 मुस्लिम परिवार है, जो कई वर्षों से एक साथ छठ पर्व मनाते आ रहे हैं.

बिहार के वैशाली जिले के मोहनपुर गांव के निवासी मंजूर आलम, नजमा खातून, लाडली बेगम तथा मोहम्मद नजीर सभी मुस्लिम हैं, लेकिन इनमें एक चीज़ आम है, ये सभी छठ पूजा करते हैं. ये छठ का त्योहार उसी तरह मनाते हैं, जैसे हिंदू मनाते हैं.

पटना के 50 वर्षीय मंजूर ढोल बजाने का काम करते हैं और पर्व के दौरान वह अपने ढोल के साथ घाट पर जाते हैं. वे कहते हैं, “हम छठ पर्व पिछले 34 वर्षो से मना रहे हैं और अपनी अंतिम सांस तक इसे मनाते रहेंगे.”

समस्तीपुर ज़िले की निवासी लाडली बेगम बीते आठ वर्षो से छठ पर्व मना रही हैं. अपने 10 वर्षीय बेटे के गंभीर रूप से बीमार पड़ने के बाद लाडली छठ पर्व मना रही हैं. किसी के कहने पर उन्होंने छठ पर्व शुरू किया था, जिसके बाद उनका बेटा स्वस्थ हो गया. अब वे हमेशा सूर्य की आराधना करती हैं

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कई गांव ऐसे हैं, जहां मुस्लिम परिवार छठव्रतियों को दूध, फल और अन्न देकर अपनी निष्ठा दिखाते हैं. इतना ही नहीं, गांव की गलियों की सफ़ाई भी करते हैं.

छठ पूजा आस्था की ही नहीं, वरन पूरे समाज की पूजा है. धर्म, जाति और बोली से परे हटकर इसे देखने की ज़रुरत है. कहा जाता है कि जो हर जगह से निराश होते हैं, उसे छठ या सूर्य भगवान से ही आस रहती है. ऐसे में छठी मईया उनके लिए एक वरदान हैं, जो पत्थर में दूब उगाती हैं.

इसी के साथ आज नहाय-खाय के साथ शुरू हो गए लोक संस्कृति के महापर्व छठ की ग्लोबल गुमटी की तरफ से शुभकामनाएं

तो कैसा लगा आपको ये सब पढके, कमेंट कर बताये हमें अपनी राय. और अगर पोस्ट ने आपको छुआ तो शेयर ज़रूर करें….फिर मिलेंगे…कहाँ?? अरे यहीं…अपनी गुमटी पर…आते रहिएगा

 

 

 

2 Comments on “गंगा जमुनी लहरों पर जब छठ मनाते हैं मुसलमान तब दिल कहता है, वाह मेरी जान हिंदुस्तान

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