ग्लोबल गुमटी

नेपाल

कुछ नये दोस्त, ढेर सारी तस्वीरें और एक चुटकी ज़िन्दगी

ऐ ज़िन्दगी तुम पहाड़ जैसी हो, तो पहाड़ क्यूँ नहीं …नेपाल डायरीज -1

नेपाल डायरीज-1 -बस अचानक ही बैठे बैठे नेपाल का प्रोग्राम बन गया. लम्बा वीकेंड था, हमें कहीं जाना था, बिहार में हैं तो सोचा चलो नेपाल चलते हैं.निहायत ख़राब रास्तों से होती हुई एक लम्बी रोड ड्राइव के बाद हम रक्सौल पहुंचे और वहाँ से बीरगंज के रास्ते हम नेपाल में दाखिल हुये. थकान बहुत ज्यादा थी पिछले दिन की तो हम सो गये गाड़ी में. ड्राईवर ने हमसे कहा कि अब नज़ारा देखने का टाइम आया है तो आप लोग सो रहे हैं. हमने उसे “भाड़ में जाये तुम्हारे नज़ारे “ वाला लुक दिया और फिर सो गये, हम बहुत थक चुके थे.

बीच में जब नींद खुली तो एक अलग ही आसमान था सामने, खुला, नीला आसमानऔर छोटे छोटे पहाड़ उचक कर आसमान छूने की कोशिश करते. मुझे ख़ुशी हुई कि मैं सो गयी थी, मुझे जागकर पहाड़ों में आँखें खोलना हमेशा से अच्छा लगता है ,एक खूबसूरत सपने में जाने जैसा, हकीकत से बहुत दूर. और आँखें खोलने के बाद जब आप फ़ोन चेक करने की जगह गाड़ी की खिड़की का काँच नीचे करते हैं,टिक कर बाहर देखने लगते हैं, मुस्कुराते हैं तो समझिये कि आप पहाड़ों में हैं.

चारों ओर बिछा हरा गलीचा, चेहरे पर लगती ठंडी हवायें, गाहे बेगाहे मिल जाती पहाड़ी स्ट्रीम्स और कोहरे के परदे के पीछे का रास्ता, अब कौन सी थकन और कौन सा बिहार. सब कुछ बहुत पीछे छूट गया था, रह गया था तो बस पहाड़ों के कन्धों पर सर टिकाना और किसी अधूरी रह गयी कविता का फिर से लिखा जाना. रास्ते में पुल दिखता है, कोई बहुत पुराना पुल पर बेहद खूबसूरत. क्या पुल ही उम्मीद का,आसरे का दूसरा नाम नहीं है, पुल ही तो है जो दो कभी न मिलने वाले हिस्से को जोड़ता है.क्यूंकि पुल सिर्फ सिर्फ एक पुल नहीं होता, वह जोड़ता है कल को आज से. वह जोड़ता है दो सिरों को, दो किनारों को जो हाथ पकड़ कर चलना चाहते हैं, जैसे रेल की पटरी पर चलती सुधा और उसका हाथ थामे किनारे किनारे चलता चंदर , क्यूंकि पुल उस रात की तरह होता है जो छोड़ जाती है एक ओस मन की किसी सतह पर और हम उस ओस को जीने दोबारा उस रात में लौटते हैं .

ऊपर की ओर हाथ दिखाकर ड्राईवर कहता है कि शाम होने से पहले हमें वहां दमन पहुंचना है, हम उस ऊँगली की दिशा में देखते हैं और सिर्फ दिखता है कोहरे का कम्बल ओढ़ कर खड़ी एकचोटी , अक मोटा कम्बल जिसके किनारे उधड़ गये हैं और वो बदल बन कर नीचे की तरफ गिर रहे हैं. रास्ते में गाड़ी रूकती है,घुमावदार संकरें रास्तों पर कोई गाड़ी अगर  रुक जाये तो पीछे की सारी गाड़ियाँ रुक जाती हैं. बाहर बारिश हो रही है, सामने एक बहुत ऊँचा पहाड़ है जिसमें से बादल झरने की तरह गिर रहे हैं. मेरे और उस पहाड़ के बीच में है एक लम्बी खाई, यहाँ कोई पुल नहीं है.आस पास सब सेल्फी ले रहे हैं , मैं उस मोमेंट में होकर भी नहीं .मैं पहाड़ से कुछ कहने की कोशिश करती हूँ, नहीं कह पाती, जानती हूँ कि आखों की कोर पर टिका हुआ एक आंसू है.

मैं नहीं कह पाती, पर पहाड़ समझ जाते हैं , समझ जाते हैं कि यहाँ इस विश्व के सबसे ऊँचें पर्वतों की श्रंखला के सामने हम, हमारी परेशानियां, आगे बढ़ने की बेमतलब की दौड़, सफलता,असफलता सब कुछ बेमानी है , पहाड़ मुझसे कहता है कि वो जानता है कि मैं क्या सोच रही,मैं उससे कहती हूँ कि मैं भी नहीं जानती कि मैं क्या सोच रही. आगे का रास्ता क्लियर हो गया है, अब लौटना है गाड़ी की तरफ. मैं आगे बढती हूँ, एक बार फिर पलट के पहाड़ों को देखती हूँ, वो कहता है कि वो समझता है.

हर यात्रा के साथ कुछ वापस लाती हूँ,कुछ संजो कर, कुछ खरीद कर . डायरी में लिखा कोई नया पोस्ट, फोन पर सेव कोई नया नंबर , कुछ नये दोस्त, ढेर सारी तस्वीरे और एक चुटकी ज़िन्दगी. पर इस बार की यात्रा अलग थी, नेपाल के एक छोटे पहाड़ी गाँव में जहाँ से एवरेस्ट ताका झांकी कर रहा था,वहां से मैं कुछ ला ही नहीं पायी. मैं वही रह गयी जैसे ठिठक गया हो कोई रिकॉर्ड, सूने से प्लेटफार्म पर रुकी हुई कोई ट्रेन.पटना की इस उंघती उबासी सी शेहरी दुपहरी में मैं जानती हूँ कि मैं ठहर गयी हूँ बाहर  की बर्फ में,पहाड़ी रातों की निस्तब्धता में, “एक बार ऐसा हुआ” वाले किस्सों में, बेबाक दोस्ती के फसानों में, बैकस्ट्रीट बॉयज के गानों में, एक नयी बनती पिघलती कहानी में और मेरी डायरी में बंद उस आर्किड में.

 

दूर तक फैले नीले दुपट्टे के नीचे

चेहरे को ढंके कोई छोटी लड़की

हँसते, शर्माते, थोड़ाखिलखिलाते

अपने ही खेल पर इतराते

हाथों में हरी चूड़ियाँ डाले

जो पिछले मेले से ख़रीदी  थी

एक पहाड़ी दुल्हन सरीखी

फूलों को पहने, दरख्तों को डाले

देवदार के मंडप के नीचे

हंस रही थी ओंठों को  दबाये

दूर तक फैले नीले दुपट्टे के नीचे

चेहरे को ढंके कोई छोटी लड़की”

To be contd………………………………………….

4 Comments on “कुछ नये दोस्त, ढेर सारी तस्वीरें और एक चुटकी ज़िन्दगी

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