ग्लोबल गुमटी

ओम पुरी

ओम पुरी को याद करते हुए

मेरे दुनिया छोड़ने के बाद, मेरा योगदान दिखेगा और युवा पीढ़ी में विशेष रूप से फिल्मी छात्र मेरी फिल्में जरूर देखेंगे“- ओम पुरी, दिल्ली, 23 दिसम्बर 2016

ओम पुरी ने जब सिनेमा जगत में कदम रखा तब अमिताभ बच्चन, राजेश खन्ना, और कपूर खानदान की कई बड़ी हस्तियों का सिनेमा में वर्चस्व था. एक अत्यंत ही साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले ओम पुरी साहब के लिए सिनेमा के बारे में सोचना तक बड़ी बात थी.

अपने अंतिम दिनों में पत्नी नंदिता से तलाक, भारतीय आर्मी को लेकर टिप्पणी और फिर माफ़ी, अकेलेपन से अवसाद में रहना और फिर लगातार शराब के लत ने ओम पुरी को तोड़ कर रख दिया था.

2009 की बात है जब नंदिता पूरी ने ओम पुरी की बॉयोग्राफी ‘अनलाइकली हीरो: द स्टोरी ऑफ़ ओमपुरी’ में उनके बेहद निजी मामलो को उजागर कर दिया था, इस बॉयोग्राफी में अतीत में नौकरानी और केयर टेकर लक्ष्मी के साथ उनके संबंधों की खुलासा कर देने से ओम पुरी काफी दुखी हो चले थे. उन्हें लगा की इन घटनाओं से उनके फैन के बीच गलत संदेश चला जाएगा. उनकी पहली पत्नी सीमा कपूर से भी सम्बंधित कुछ ऐसे मामलो को नंदिता जी ने उजागर किया था जिसको लेकर ओम पुरी बेहद नाराज थे.

अम्बाला, पंजाब के बाशिंदे ओम पुरी साहब का बचपन बेहद आर्थिक तंगी में गुजरा और सात साल की उम्र में एक ढाबे पर ओम पुरी ने काम शुरू कर दिया था. ढाबे पर चोरी का इल्जाम लगाकर मालिक ने उन्हें निकाल दिया था. ओम पुरी साहब ने कई इंटरव्यू में बताया था कि उनके जीवन का लक्ष्य था रेलवे ड्राइवर बनना.

अम्बाला छोड़ने के बाद वे पढ़ाई के लिए नाना-नानी के पास पटियाला चले गए और पार्ट टाइम में एक वकील के यहां मुंशी की नौकरी कर ली. उसके कुछ समय बाद ही उन्‍होंने कैमिस्‍ट्री लैब में असिस्‍टेंट की नौकरी शुरू की. इतने संघर्ष के बाद ओम पुरी साहब का व्यक्तित्व निखर कर आया.

इसी दौरान पटियाला में कॉलेज में हुए विभिन्न फेस्ट्स में भाग लेकर अपनी नाट्य प्रतिभा से ओम पुरी ने पंजाब कला मंच वालो को आकर्षित कर लिया. पंजाब कला मंच के बाद ओम पुरी एनएसडी से जुड़े फिर एफटीआईआई, पुणे से पढ़ाई कर पूर्ण प्रशिक्षित होकर उन्होंने अभिनय क्षेत्र में कदम रखा. नसीरुद्दीन शाह और ओम पुरी उन चंद अभिनेताओं में से हैं जो जो एनएसडी और एफटीआईआई दोनों से पढ़े. डेविड धवन थोड़े दिन एफटीआईआई में उनके रूममेट भी रहे. ओम पुरी साहब ने एक्टिंग की कक्षाएं भी ली जिनमे उनके प्रिय शिष्यों में अनिल कपूर, गुलशन ग्रोवर आदि रह चुके हैं. सिनेमा के दोनों तरह के दायित्वों व्यावसायिक और सामाजिक चेतना जगाने के उद्देश्यों को वो भली भांति समझते थे. ओम साहब के अनुसार-

सिनेमा दो प्रकार के होते हैं. एक सिर्फ मनोरंजन के लिए और दूसरा दिल छूने के लिए। दोनों का अपना उद्देश्य है.’ 

साधारण शक्ल सूरत वाले इस शख्श ने फिल्म इंडस्ट्री में एक अति महत्वपूर्ण स्थान बना लिया. ओम पुरी ने अपने फ़िल्मी सफर की शुरुआत मराठी नाटक पर आधारित फिल्म ‘घासीराम कोतवाल‘ से की थी. 1980 में रिलीज ‘आक्रोश‘ उनकी पहली हिट फिल्म थी. वहीं ‘माचिस‘, ‘अर्द्धसत्य‘, ‘आरोहण‘, ‘मंडी‘, ‘मिर्च-मसाला‘, और ‘गांधी‘ सरीखी फिल्मों ने उन्हें गंभीर अभिनेता के तौर पर पहचान दिलाई.

रिचर्ड एटनबरो की मूवी गाँधी में 90 सेकेण्ड के दृश्य में ही ओम पुरी ने लोहा मनवा दिया. ब्रिटेन और हॉलीवुड की फिल्मों में ओम ने एक बेहतरीन स्थान बना लिया था. ओम पुरी ने ‘ज्वैल इन द क्राउन’, सिटी ऑफ़ जॉय, ‘माई सन द फ़ैनेटिक’ , ‘ईस्ट इज़ ईस्ट’ जैसी अंग्रेज़ी फ़िल्मों में महत्वपूर्ण किरदार निभाया. चौसर की ‘द कैंटरबरी टेल्स’ के बीबीसी ड्रामा के रूप में प्रदर्शन में भी उनको जगह मिली. 1990 में उनकी प्रतिभा और सिनेमा में उनके योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री से भी नवाजा गया.

अपने करियर के दैरान 300 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय कर चुके ओम पुरी की अभी लगभग 3 फिल्में जल्दी रिलीज होंगी. जिनमे ब्रिटिश फिल्म ‘वायसरॉय हाउस’, कबीर खान की ‘ट्युब्लाइट्स’, दलित समस्या पर ‘रंभाजान जिंदाबाद’, तेलुगू फिल्म ‘गाज़ी’ आदि हैं.

ओम पुरी साहब आज हमारे बीच नही हैं, पर उनके अभिनय ने उन्हें अमर कर दिया है. सिनेमा देखने और चाहने वालो के लिए एक युग का अंत हुआ. उल्लेखनीय है कि ओम पुरी साहब ने एफटीआईआई, पुणे के कैंटीन में लगाए गए उनके उधार के बिल को फ्रेम करा कर रख लिया था. ढाबे पर बर्तन साफ करने से लेकर सिनेमा की दुनिया में शिखर तक पहुँचने की उनकी कहानी बेहद प्रेरक है. आज की युवा पीढ़ी के सामने ओम पुरी ने एक आदर्श स्थापित कर दिया है जिन्हें अपनाकर हम हर बाधा पर विजय पा सकते हैं.

ग्लोबल गुमटी की ओर से ओम पुरी जी को शत शत नमन !

अभिनव मिश्रा
राजनीतिक सामजिक मुद्दों पर इनके लेख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं. मूलतः बिहार के गोपालगंज से आते हैं. बीएचयू से पढाई की है और अभी जेएनयू में शोधार्थी हैं.
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