ग्लोबल गुमटी

ये रहे पुरानी फिल्मों के वो डायलॉग्स जो आज भी लोगों की जुबान पर चढ़े हुए हैं

तीन दशक भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में ऐसे गुजरे जो अपनी कुछ ख़ास पहचान के लिए हमेशा जाने जायेंगे. ये दशक थे- सत्तर, अस्सी और नब्बे के. उस दौर की फिल्मों के डायलॉग्स आज भी लोगों की जुबान पर चढ़े हुए हैं और गाहे बगाहे हम उन्हें अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में भी बोल जाते है. वो दौर था, धर्मेन्द्र का, अमिताभ बच्चन का, और राजकुमार जैसे बेहतरीन कलाकारों का, जिनकी फिल्मों के डायलॉग्स कहानी की जान हुआ करते थे.  दौर बदला तो फ़िल्में भी बदली और फिल्मों के संवाद भी. अगर आप आज की बात करें तो ऐसी बहुत कम फ़िल्में बन रहीं हैं जिनके डायलॉग्स यादगार हो. तो आइये ले चलते हैं आपको गुमटी के झरोखें से पुरानी फिल्मों के उस दौर में और देखते हैं कुछ डायलॉग्स-

1. ठहरो! ये शादी नहीं हो सकती

दूल्हा दुल्हन के गले में वरमाला डालने को तैयार है और तभी दुल्हन का आशिक आ कर कहता है कि ये शादी नहीं हो सकती. इस डायलॉग के बाद आप को पता रहता था कि गुरु अब कोई ड्रामा होने वाला है.

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2. पुलिस ने तुम्हें चारों तरफ़ से घेर लिया है

इस डायलॉग के बाद मुजरिम को पता रहता था कि गुरु अब पुलिस से बचना मुश्किल है.

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3. लोग देखेंगे तो क्या कहेंगे

हीरो और हीरोइन के बीच रोमांस जब चरम पर रहता था और हीरो अपनी प्रेमिका को बाहों में लेता ही था कि तभी हीरोइन के अंदर की भारतीय नारी जाग जाती थी और उसे लोगों का डर लग जाता था

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4. अगर मां का दूध पिया है तो बाहर निकल

अगर किसी की मर्दानगी को ललकारना है तो इस डायलॉग का इस्तेमाल होता था. इसके बाद हीरो हो या विलेन, उसे मैदान में आना ही पड़ता था.

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5. हीरे कहां हैं?

पुरानी फिल्मों में हीरों के पीछे बड़ी लड़ाई हुई है यार. कोई न कोई हीरे चुरा लेता था, फिर ढिशुम-ढिशुम के बाद जो सबसे बड़ा सवाल पूछा जाता था वो यही कि ‘हीरे कहां हैं’. और वो हीरे अंत में जिसके पास होते थे वो हीरो को देकर मर जरूर जाता था.

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6. बचाओ! भगवान के लिए मुझे छोड़ दो

फिल्मों की अबला नारी पर दुर्जन हो जाते थे भारी और तब उसकी ललकार निकलती थी कि ‘भगवान के लिए मुझे छोड़ दो’. फिर क्या! हीरो आता था और इन नामुरादों को सबक सिखाता था. यकीन जानिये हीरों आता ही था. कभी लेट नहीं हुआ था. 

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7. मैं ये एहसान ज़िन्दगी भर नहीं भूलूंगा

पहले की फिल्मों में कोई न कोई दानवीर कर्ण होता था जो ज़रूरतमंद की मदद कर देता था और फिर सनसनी को चीरते हुए डायलॉग आता था कि ‘मैं ये एहसान ज़िन्दगी भर नहीं भूलूंगा’.

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8. पुलिस मेरे पीछे लगी हुई है

एक तो पुरानी फिल्मों में पुलिस का काम समझ नहीं आता था. जब देखो तब पीछे ही रहती थी और तब तक मुजरिम नया प्लान बना कर कल्टी हो जाता था.

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9. कानून के हाथ बहुत लम्बे होते हैं

यार इस गुत्थी का हल आज तक समझ नहीं आया है कि आखिर कानून के हाथ कितने लम्बे हैं और अगर इतने लम्बे हैं तो मुजरिम कानून से बच कर कैसे भाग जाता है.

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10. भगवान…मैंने तुमसे आज तक कुछ नहीं मांगा

भगवान तक सिफ़ारिश पहुंचाने के लिए पुरानी फिल्मों में हीरो मंदिर की घंटियां बजाता और फिर ये बोल कर ऊपरवाले से अपनी बात मनवा लेता कि ‘मैंने आज तक कुछ नहीं मांगा’. झूठा कहीं का!

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11. गवाहों के बयानात और सबूतों को मद्देनज़र रखते हुए

पुरानी फिल्मों के जजों को शायद एक ही दफ़ा याद थी… ताज़-ई-राते हिन्द, दफ़ा 302 के तहत, मुजरिम को सज़ा-ऐ-मौत दी जाती है. कोर्ट के सीन में अगर ये डायलॉग नहीं बोला गया तो जज का काम पूरा नहीं हुआ है.

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12. मैं तुम्हारे बच्चे की मां बनने वाली हूं

 अरी बेटा! अगर हीरोइन ने ये डायलॉग मार दिया है तो मतलब हीरो की लंका लगने वाली है. फिर ऐसा ड्रामा होगा कि तुम्हें लगेगा की यार कुछ न करता तो अच्छा ही रहता.

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जी ये कुछ डायलॉग्स थे जिन्हें आप पुरानी फिल्मों में सुना करते थे. अगर आप को भी ऐसे मज़ेदार डायलॉग्स याद आएं तो कमेंट कर के ज़रूर बताइयेगा, नहीं तो याद है न ‘क़ानून के हाथ बहुत लम्बे होते हैं’.

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2 Comments on “ये रहे पुरानी फिल्मों के वो डायलॉग्स जो आज भी लोगों की जुबान पर चढ़े हुए हैं

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