ग्लोबल गुमटी

देश की सीमा पर जान अड़ाए खड़े सैन्य सपूतों के यश को मत बाँटिये

सब करिये, पर इतना करम करिये के देश की सीमा पर जान अड़ाए खड़े सैन्य सपूतों के यश को मत बाँटिये।इनके यश को राजनीती के गिद्धभोज में चटनी की तरह मत बाँट दीजिये।

हम आप तो सदा किसी न किसी का झंडा उठाये नाचते चिल्लाते रहेंगे।कभी हाथ,कभी फूल,कभी झाड़ू घुमाते रहेंगे।सत्ताएं आती जाती रहेंगी, कुर्सियां मिलती खिसकती रहेंगी,सरकारें उठती गिरती रहेंगी पर इन सब के बीच इस देश का मान कभी न गिरे ये पवित्र जिम्मेदारी उन वीर जवानों ने उठा रखी है जो बिना हिले बंदुक की नोक पर सधे साँस रख बैठे हैं चौबीसों घंटे इस देश की हिफाज़त के लिए।

वर्ना बस नेताओं, अभिनेताओं से ही देश की आबरू बचनी थी तो देख ही रहे हैं कैसे कभी कोई नेता नीचता की हद पार कर चौका देता है तो कभी कोई हीरो अपनी खलनायकी से झंटुआ देता है।भूगोल देखिये न,ये देश चारो तरफ से ऐसे देशो से घिरा है जैसे रज़िया गुंडों के बीच।ऐसे में हम अगर ये कहें कि देश की सेना ने पहली बार पाक को, इसके आतंकवाद को करारा जवाब दिया है तो इसका मतलब है कि या तो हम पहले अंधे थे,या अब बहरे हो गए हैं।

याद रखिये हमारे देश पर आतंकी हमले,पाक की कमीनी कारगुज़ारी,चीनी दोगलइ का डर तब भी था जब इस देश के प्रधान मौंनी सिंह जी थे।ये तब भी था, जब हर्धन हली डोडागोड़ा देवगौड़ा, गुजराल जैसे मुखिया थे इस देश के।आपको क्या लगता है,तब आतंकियों ने वाक ओवर दे रखा था क्या भारत को?तब क्या आतंकी या पाक के सैनिक भारतीय जवानों के संग लूडो खेलते थे सीमा पर और वादा कर रखा था कि, जब 2016 में तुम्हारे यहाँ मोदी सरकार रहेगी, उत्तर प्रदेश में चुनाव होंगे और हमारे यहाँ नवाज़ सरीफ होंगे तब आप सर्जिकल स्ट्राइक करना, तब हम पर हमला करना।

क्या आपको लगता है कि, ये जो साहस और तेज़ है सेना का, ये किसी सरकार की अनुकंपा है?नहीं, ये अपने वतन के लिए मर मिटने के जज्बे से बंधी निष्ठा है, ये किसी 56 या 57 इंच की कुर्सी से बंधी डोर नहीं है जो आपके हिलाने से ही हिलेगी।आप और हम चाहे जिसका झंडा ढोहिये, राजनीती का झंडुबाम घसते रहिये एक दूसरे के कपार पर, लेकिन देश के जवानों के लिए मोदी और मनमोहन दोनों के निर्णय बराबर नज़रिये से देखने होते हैं।

आपके लिए कोई माता सोनिया की तो कोई देव मोदी की सत्ता होगी, पर देश का जवान आपको देश की सत्ता मान आपके दिशा निर्देश को मानता है।ये जवान किसी दल के कार्यकर्ता नहीं, जो कभी बाजपेयी जी के यश खातिर कारगिल जीते, मनमोहन के मान को रखने होटल ताज में आतंकियों को मार गिराया और आज मोदी जी की 56 इंचिय पामीर के पठार से भी चौड़ी छाती की लाज के लिए कूद गये पाक की सीमा में 3 किलोमीटर।ये जवान हमेशा देश के लिए लड़े थे,लड़ते हैं,और लड़ते रहेंगें।

ये बोल कर की ,”पहली बार मिला है पाक या आतंक को जवाब, या पहली बार दिखाया सेना ने दम” सेना के 1947 की आज़ादी के पहले दिन से आज तक आपके लिए लड़ते शहीद होते उनके गौरवशाली इतिहासः को हल्का तो न कीजिये।ये देश मनमोहन जी की पगड़ी या मोदी जी की दांत भींच के मुट्ठी बांधे वाले फोटो के कारण महफूज़ नहीं है साब, शहीदों ने जो अपने खून से लक्ष्मण रेखा खिंच रखी हैं न उसी की नेमत है ये हमारी आपकी हिफाज़त।सेना की काबिलियत और उसके शौर्य पर ऊँगली उठाने वाले डूब मरिये।

अभी भी सीमा पर कोई जवान मेरे लिए लड़ रहा होगा, तब ही इतने सुकून से, एडिट वेडिट कर, वर्तनी फर्टनी की अशुद्धि चेक कर इतना लंबा लंबा फेंक पा रहा हूँ फेसबुक पर।जय हो।

 

नीलोत्पल मृणाल 

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