ग्लोबल गुमटी

उस जगह सिर्फ एक ही चीज़ सीखी- भूखे रहना

अपनों को छोड़कर कामकाज की तलाश में बहुत सारे लोग देश के बाहर जाते हैं इन्हीं में से एक है सज्जाद अंसारी. मध्यम परिवार से है तो घर का खर्चा चलाने के लिए 8 साल पहले सऊदी अरब गए थे. इस उम्मीद के साथ कि वहां मेहनत कर कुछ पैसा कमाएंगे तो गांव में उनका परिवार खुशहाल जिंदगी जी पाएगा.

सऊदी अरब में एक बड़ी कंपनी में काम करने लगे. बीते साल नवंबर तक सब कुछ ठीक था फिर अचानक कंपनी ने उन्हें निकाल दिया और बिना कोई कारण बताए उनकी सैलरी मिलने भी बंद हो गई

सज्जाद अंसारी बताते हैं कि पहले उनकी सैलरी मिलना बंद हुई फिर मेडिकल की सुविधाएं बंद हो गई और उसके बाद भोजन भत्ता भी बंद हो गया ऐसी हालत में सज्जाद अंसारी जैसे हजारों भारतीय कामगार अचानक से बेघर और खाने-पीने जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए भी मजबूर हो गए

उन्होंने भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई भारत सरकार ने इस पर एक्शन लेते हुए 45 भारतीय श्रमिक को वापस बुला लिया है

सज्जाद अंसारी बिहार के गोपालगंज के रहने वाले हैं वह कहते हैं कि उन्होंने कभी भी नहीं सोचा था कि उन्हें एक दिन इस तरीके से भारत लौटना होगा वह कहते हैं सब किस्मत की बात है लेकिन यह सबसे अच्छा अच्छा हुआ कि हम सुरक्षित अपने देश वापस लौट आए हैं फिर से नई जिंदगी शुरू करूंगा. वह कहते हैं मेरे पास कोई पैसे नहीं थे तो घर वालों के लिए कुछ नहीं ला पाया. कुछ दोस्तों ने बच्चों के लिए तोहफे दिए हैं. कर्ज लेकर सऊदी अरब गया था. लौट रहा हूं तो यह कर्ज और बढ़ गया है.भारत सरकार ने अगर सऊदी कंपनी से हमारी सैलरी का पैसा नहीं दिलाया तो जिंदगी बहुत मुश्किल हो जाएगी. सज्जाद अंसारी ने कहा है कि वहां मैंने एक ही चीज सीखी भूखे रहना. कई दिनों तक 24 घंटे में सिर्फ एक बार खाने को मिलता था बीवी से बात करने की हिम्मत नहीं होती थी घरवालों को झूठे दिलासे देते रहता था कि सब ठीक है.

कहते हैं कि हमारा पैसा बहुत मेहनत का है हमें भरोसा है कि हमारी सरकार हमें हमारा हक जरूर दिलवाएं

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