ग्लोबल गुमटी

सविता भाभी

सविता भाभी और हमारे ऊपर थोपी हुई संस्कारिता

सविता भाभी और हमारी हिपोक्रिसी

हाल ही में खबर आई की पहलाज निहलानी वाले सेंसर बोर्ड ने फिल्म बार बार देखो में सविता भाभी के ज़िक्र वाले एक सीन पर कैंची चला दी है. आप पोर्न साइट्स पर बैन लगाइये, फिल्म्स को साफ़ सुथरा बनाइये पर इस थोपी हुई संस्करिकता से ज़रा ऊपर उठकर आंकड़ों पर नज़र डालिये.

पिछले साल शादीशुदा जोड़ों को गैर महिलाओंं/मर्दों के साथ अफेयर बनाने मेें मदद करने वाली वेबसाइट एशले मेडिसन का डाटा लीक हो गया। करोड़ों की संख्या में इस साइट जुड़े लोगों मेंकरीब 3 लाख भारतीय भी मौजूद हैं ऐसा पहली बार नहीं है कि भारतीयों को इस तरह की दबी इच्छा को पूरी करने का जरिया मिला हो। मार्च, 2008 में भारतीय मूल के यूके निवासी पुनीत अग्रवाल (छद्म नाम देशमुख) ने सविता भाभी नाम से वेबसाइट शुरू की। शादीशुदा सविता अन्य पुरुषों के साथ फ्लर्ट करती थी। कार्टून के रूप में प्रस्तुत सविता भाभी वेबसाइट को उस जमाने में भारतीयों ने बेहद पसंद किया। महज 6 महीने में ही 30,000 भारतीय यूजर्स इस पर रजिस्टर हो गए।

आपको बता दें कि ‘सविता भाभी’ कॉमिक बुक पोर्न कैरेक्टर है और इंटरनेट की दुनिया में यह कैरेक्टर काफी लोकप्रिय है।जून 2009 में इस वेबसाइट पर भारत सरकार ने बैन लगा दिया। तब तक सविता भाभी वेबसाइट पर डेढ़ करोड़ विजीटर्स हो गए। इस बैन से वेबसाइट पर यूजर्स की संख्या और ज्यादा बढ़ गई। सविता भाभी पर लगे बैन पर विशेषज्ञों की बहस शुरू हो गई। कईयों ने इसे व्यक्तिगत च्वॉइस की स्वतंत्रता पर अंकुश बताया तो बहुत से लोगों ने इसे सही ठहराया।बीच में एक लम्बे बैन के बाद 2010के आखिर में सविता भाभी वेबसाइट पर 25 डॉलर की मासिक सबक्रिस्प्शन फीस ली जाने लगी। नए रूप में पेश सविता भाभी साइट पर 2 मिलियन लोग आने लगे जिसमें से 8 फीसदी महिलायें थी जो अब बढ़कर 3३ फीसदी हो गया है ।

कुछ समय पीछे जाती हूँ, हमारी बायोलॉजी की क्लास चल रही थी, आज रिप्रोडक्टिव सिस्टम मैडम को पढ़ाना था, मैडम क्लास में आती हैं, जल्दी जल्दी ऊपर से रिप्रोडक्टिव सिस्टम पढ़ाती हैं, चैप्टर के पीछे के हिस्से को पढने की जरुरत नहीं है ऐसा कहकर, नर्वस सिस्टम वाले चैप्टर में पहुँच जाती हैं.

लड़के मायूस और लड़कियां राहत की सांस लेती हैं. एक ऐसा दिन जिससे हम सब लडकियां डर रही थी उस खतरे को मैडम ने कितनी आसानी से टाल दिया. हाँ टाल दिया, हम टाल जाते हैं बच्चों को उनके ही शरीर के बारे में समझाना, हम टाल जाते हैं अपने परिवार के छोटे बच्चों को सही और गलत टच के बारे में बताना,हम टाल जाते हैं बच्चों को बताना कि  puberty जैसी भी कोई बला होती है,हम बस लड़कियों से कह देते हैं कि “ठीक से बैठो बड़ी हो गयी हो, अब दुपट्टा लिया करो बड़ी हो गयी हो”, हम टाल जाते हैं लड़कों को ये समझाना कि ये बड़ा हो जाना क्या होता है,हम टाल जाते हैं अपनी ही शिक्षा व्यवस्था में सेक्स एजुकेशन जैसी एक नितांत जरुरी बात को शामिल करना, हम टाल जाते हैं इसीलिए एक पूरी जनरेशन इस बारे में बात नहीं करना चाहती, हम टाल जाते हैं किसी से भी बात करना क्यूंकि हमारी यह कंडीशनिंग हुई है कि अगर उस बारे में बात नहीं की जा रही है तो वो गलत है.हम टाल जाते हैं और हमारे इसी टालने की हिपोक्रिसी से जन्म लेती है सविता भाभी

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