ग्लोबल गुमटी

क्या शाहरुख़ के ट्वीट् से कश्मीर छोड़ देगा पाकिस्तान?

उरी हमले पे मुस्लिम सेलेब्रेटी की प्रतिक्रिया ही जरूरी क्यों है आखिर?

आजकल देश में किसी भी आतंकवादी घटना के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट प्रकट होते हैं और झटपट में ट्रेंड करने लगते हैं| इन पोस्ट्स में एक बड़ी मासूम सी शिकायत होती है कि आखिर कुछ फ़िल्मी सितारों ने इस घटना की निंदा में क्यूँ नहीं कुछ कहा| जबकि फलना फलना सितारों ने ये ये ट्वीट करके इन इन शब्दों में अपनी देशभक्ति की ज्वाला दिखाई| इन पोस्टों में एक कॉमन चीज होती है कि शिकायत सिर्फ मुस्लिम सेलेब्रेटीज से होती है जबकि उनके सामने हिन्दू सितारों के बयानों को सवाल के तौर पर खड़ा किया जाता है|ऐसा ही उरी आतंकवादी हमले के बाद भी हुआ| एक पोस्ट ट्रेंड करने लगा कि शाहरुख़ और आमिर खान ने इस घटना की निंदा में चुप क्यूँ हैं जबकि अक्षय कुमार ने तो ये बोलके पाकिस्तान को थर्रा दिया| ये समझ नहीं आता कि हर आतंकवादी हमले की तरह उरी हमले पे मुस्लिम सेलेब्रेटी की प्रतिक्रिया हीं जरूरी क्यों है आखिर?

इन पोस्टों में जाहिर है मुस्लिम सितारों के लिए जो भाषा और उपमाएं प्रयोग की जातीं है कहने की जरूरत नहीं वो विजय माल्या की तरह हीं मासूम होती हैं|

इसी तरह की मंशा के पोस्ट एक प्राकृतिक आपदा के समय भी वाइरल हुए थे या किये गए थे जिनमें बताया जा रहा था कि अक्षय कुमार ने राहत कोष में इतनी बड़ी राशि भेजी है जबकि शाहरुख़ और आमिर ने एक फूटी कौड़ी नहीं डाली| मुझे तब भी समझ नहीं आया था कि क्या कोई RTI डालकर राहत कोष में पैसे डालने वाले सभी लोगों के नाम निकलवाये गए थे और जिस RTI का जवाब २-३ दिनों के अन्दर मिल गया था| ऐसे RTI आवेदन को राष्ट्रीय संग्रहालय में और आवेदनकर्ता को सूचना के अधिकार के ब्रांड एम्बैसडर की जगह मिलनी चाहिए|

खैर शाहरुख़ ने तो उरी हमले की रात में ही ट्वीट कर दिया था|

 

 

 

Saddened to hear of the cowardly attack in Uri. Prayers for the families of our martyred soldiers. & may the terrorists b punished soon!

 

पर सवाल ये है कि आखिर किसी हमले पे हमें मुस्लिम सेलेब्रेटीज की निंदा ही क्यूँ चाहिए होती है? क्या सालों से चली आ रही सरकार की कड़ी निंदा काफी नहीं? और अगर शाहरुख़, आमिर की कड़ी निंदा देश के प्रधानमंत्री, गृहमंत्री से ज्यादा असर कर सकती है तो कम से कम अजित डोभाल और विकास स्वरुप को बोल दें कि खुद निंदा न करके शाहरुख़ और बाकियों के बयान ही रिट्वीट कर दिया करें|

या कहीं ये वही मानसिकता तो नहीं जो मानती है कि हिन्दू तो स्वाभाविक रूप से भारतभक्त हैं और ये तो मुसलमान हैं जिन्हें अपनी देशभक्ति साबित करनी होगी ट्वीटर और फेसबुक के जरिये या शायद प्रेस कांफ्रेंस कर के पाकिस्तान की कड़ी निंदा करके|

क्या ये वही मानसिकता नहीं जो सड़क से गुजरते हुए किसी मुस्लिम बहुल बस्ती को बिना एक पल भी सोचे अनायास ही मिनी पाकिस्तान कह देती है।अगर मानसिकता यही है तो शायद उलेमा काउन्सिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना आमिर रशादी का ये बयान भी मुसलामानों का पाकिस्तान के प्रति गुस्सा हिन्दुओं जितना साबित न कर सके कि सरकार को तत्काल पाकिस्तान के साथ सभी समझौतों और संबंधों को तोड़ देने कि हिम्मत दिखानी चाहिए| ऐसी मानसिकता वालों को ये याद दिलाना भी नाकाफी होगा कि अपने फिल्म “अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों” के समय फिल्म में एक आर्मी ऑफिसर का रोल कर रहे अक्षय कुमार ने फिल्म में पाकिस्तान विरोधी डायलोग्स बोलने से ये कहकर मना कर दिया था कि पाकिस्तान में भी उनके कई फैन्स हैं| इससे अक्षय कुमार तो कम देशभक्त नहीं हो गए? लेकिन अगर यही बयान किसी मुस्लिम एक्टर ने दे दिया होता तो अंदाजा लगा सकते हैं कि स्थिति क्या हो जाती।

क्या हमारी देशभक्ति इतनी बुझी हुई है कि उन छोटी छोटी बातों से भी नहीं सुलग सकती जो उन 17 जवानों ने अपनी आने वाली मौत से बेखबर हो अपने घर वालों से अपने अंतिम संवाद में कहा था| तैंतीस साल के लांस नायक आरके यादव ने शहादत के तीन दिन पहले बलिया में अपनी माँ से फोन पे कहा कि आने वाले दिनों में कभी भी उन्हें और ऊँची जगह पे तैनात किया जा सकता है जहाँ फोन संपर्क नहीं हो पायेगा इसलिए जितनी बात करनी हो अभी ही कर ले| या लोगों की देशभक्ति का उबाल क्या इतना कमजोर है कि इस तथ्य से भी नहीं उबलता कि उनकी शहादत की खबर ३ दिन बाद तक उनकी गर्भवती पत्नी को नहीं दी गयी|

शहीद रवि पाल के बेटे ने कहा कि मेरे पापा ने तिरंगे के लिए जान दी है और मैं इसका बदला लूंगा। अगर ये बयान भी सवा अरब की आबादी का गुस्सा नहीं दिखा पा रहा तो शाहरुख़ आमिर के ट्वीट कैसे दिखा देंगे?

घर के भाइयों पे अविश्वास करके तो कोई पड़ोसी से खेत की ढाई इंच के मेड़ की लड़ाई भी लड़ने नहीं जाता और हम कश्मीर की लड़ाई लड़ने की सोच रहे हैं।

मुझे कोई शक नहीं कि शाहरुख़ और आमिर की निंदा से अगर हमें पाकिस्तान लजाकर कश्मीर सौंप दे और आगे हमला न करने की शपथ ले ले तो ये एक पल की भी देर करेंगे अपनी कड़ी निंदा ट्वीट करने में। ख्याली बिरयानी जब पके तब पके पर तब तक शाहरुख़ आमिर को माफ़ कीजिये और तब तक सरकार द्वारा कड़ी निंदा से ही काम चलाइये।

2 Comments on “क्या शाहरुख़ के ट्वीट् से कश्मीर छोड़ देगा पाकिस्तान?

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