ग्लोबल गुमटी

shukriya tanishk

घर से दूर उन खूबसूरत लड़कियों के नाम…….शुक्रिया तनिष्क

शुक्रिया तनिष्क

हाल ही में तनिष्क ने अपने ज्वेलरी ब्रांड Mia का नया advertisement निकाला. बहुत ही खूबसूरती से एक कविता के धागों से पिरोया गया यह ad बताता है कि इन काम करती औरतों के लिये कुछ चीज़ें बिलकुल मैटर नहीं करती. “लड़की होने के कारण प्रमोशन मिला “ से लेकर “ शादी हो गयी,अब मैटरनिटी लीव आ जायेगा कुछ दिनों में” को ठेंगा दिखाती इन लडकियों को  work और life के balance से कोई मतलब नहीं है. ये काम करना चाहती हैं क्यूंकि ये इनकी एक आइडेंटिटी है.

कुछ समय पहले की बात है, एक प्रोजेक्ट को लीड कर रही थी. इतनी प्लानिंग, इतना समय देने के बाद भी काम हो नहीं रहा था तो थोड़ी परेशान थी. एक दिन काम करते हुये रात के 9 बज गये, सीनियर के केबिन की लाइट जल रही थी. सोचा जाते जाते आज का काम कुछ दिस्कुस्स कर लूँ, वहां पहुंची तो मेरी टीम के एक महानुभाव कह रहे थे “ अब एक लड़की से हम आर्डर नहीं लेंगे “ फिर क्या था, सब मेरे सामने था. लड़की से आर्डर नहीं लेनेगे की मानसिकता से मेरा काम आगे नहीं बढ़ रहा था. इसीलिए जब tanishq के Mia ब्रांड में एक आवाज़ कहती है

“It seems like their fragile egos i bruise, with my views

Because they think I am getting too big for my shoes

Is the last thing on my mind “

तो मैं जोर से हंसती हूँ और याद आत है मुझे मेरा वो आउटबर्स्ट “ कि सर कब तक आप लड़की से आर्डर नहीं लेंगे, या तो आर्डर देने वाले बनिये या लेने वाले, काम तो करना पड़ेगा हम सभी को  आर्डर तो लेना ही पड़ेगा”  और मैं इसे तुरंत शेयर करती हूँ

एक औरत अपने बच्चों को स्कूल भेज कर मुस्कुराते हुये  प्रेजेंटेशन पर काम कर रही है उसमें मुझे अपनी स्कूल की एक दोस्त दिखती है, दूसरी किसी ऑफिस में इंटर्न है पर डरी हुई नहीं है मुझे अपने ऑफिस की वो जोशीले इंटर्न दिखते हैं जो सही को सही कहने में नहीं हिचकती, मुझे उसी ad में छत्तीसगढ़ की वो DSP दिखती है जो गोद में 6 महीने की बेटी को लिये हुये नाईट पेट्रोलिंग पर निकली है सिर्फ एक पुलिस ऑफिसर बन के क्यूंकि

“ The catch that we shouldn’t have a screaming match

The debate that we shouldn’t be working late

Is the last thing on my mind”

व्हाट्सअप्प पर स्क्रॉल कर रही हूँ, एक दोस्त की तस्वीर देखती हूँ, खली पड़ा घर और खिड़की पर खड़ी वो की धुंधली तस्वीर, एक नये शहर में काम करना, अपना घर खुद बनाना, सब कुछ अकेले करना और फिर खिड़की पर खड़े हो कर अपनी छोटी सी दुनिया को बनते देखना, रूप लेते देखना……….कितनी खूबसूरत होती हैं काम करती आत्मनिर्भर लडकियां और फिर वो ad जब ये कहता है

“ How they fuss that market visits to Tire3 towns are not for us

Oh how heavy boxes these are

And honestly, should girls be going such a bar”

तो मैं उस ad के साथ साथ कह उठती हूँ “ Well, It’s last thing on my mind”

काम करती हुई लडकियां, हर स्टीरियोटाइप से लड़ती इन लड़कियों की खूबसूरती को सेलिब्रेट करते इस एड की लांच भी अलग हट के थी. अपने थीम के मिजाज़ से ही इस एड को लांच किया वर्जिनिया शर्मा , डायरेक्टर – लिंक्डइन, सायरी चहल, SHEROES की फाउंडर और अपने शर्तों, अपनी बेबाकी के लिये जानी जाने वाली एक्ट्रेस नंदिता दस.

आज जब जेंडर रोल्स के मायने, उनकी परिभाषायें में क्रन्तिकारी परिवर्तन आ गया है तब भी उसी समाज के कुछ हिस्से पीछे से बंधे हुये हैं. और उन हिस्सों की परवाह न करती ये काम करती लडकियां खूबसूरत दिखना चाहती हैं, खुद के लिये, आईने में जो सामने दिखता है उसके लिये. इस खूबसूरती का उनके शेप, साइज़, बालों की लम्बाई, कपड़ों से कोई लेना देना नहीं है. ये खूबसूरत हैं क्यूंकि ये अपने पैरों पर खड़ी हैं, क्यूंकि ये अपना सामान खुद उठती हैं, क्यूंकि ये बेपरवाह हैं, क्यूंकि ये बेफिकर हैं, क्यूंकि इन्हें बार में बैठकर दोस्तों के साथ ड्रिंक करने से कोई परहेज नहीं, क्यूँकी ये अपनी फेमिनिटी को दिल से स्वीकार करती हैं, ये खूबसूरत हैं क्यूंकि ये खूबसूरत हैं.

अपने आस पास ऐसी कई औरतों को देखती हूँ जो सेक्सिस्म को धता बताते हुये काम कर रही हैं, जिन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता कि लोग उनके बारे में पीछे क्या कहेंगे क्यूंकि सामने कहने की कोई गुंजाईश ही नहीं हैं. ये अपना काम करती हैं पूरे मन से और ज़िन्दगी जीती हैं जैसा ये चाहती हैं और इसीलिए घर से दूर रह अपनी ज़िन्दगी को गढ़ती लड़कियों :तुम सभी खूबसूरत  हो, बेहद खूबसूरत.

 

“अपनी हवा, अपना आसमान बनाती

अपने परों को खुद ही फैलाती

जो न कहती हैं कि ये न होगा हमसे

क्या पहनना है ये सोचेंगी खुद से

वो जोर से हंसती हैं खिलखिलाकर

“ लड़की हो “ को चलती हैं अंगूठा दिखाकर

किसी “का” से नहीं है जिनका इम्तिहान

खुद से ही चलना है और छोड़ना है कुछ निशान

वो आखिरी मेट्रो से लौटती लड़की

वो लास्ट लोकल में उंघती लड़की

सुबह के 7 बजे ऑटो को देखते

स्कूटी में किक लगते और फिर उड़ते

जिसके कैलेंडर में है मीटिंग और PTA साथ साथ

उन जिद करती औरतों की तरफ से

खूबसूरत सभी काम करती लड़कियों की तरफ से
शुक्रिया तनिष्क इस खूबसूरत कविता के लिये.

3 Comments on “घर से दूर उन खूबसूरत लड़कियों के नाम…….शुक्रिया तनिष्क

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